PRAYAGRAJ NEWS: बुधवार को संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से सांस्कृतिक संस्था भोर एक सृजन द्वारा आयोजित गंगा की अविरल यात्रा की भावपूर्ण संगीतमय प्रस्तुति का सफल आयोजन आज 27 मई को सायं 7:00 बजे हरिहर गंगा आरती समिति,रामघाट, प्रयागराज में सकुशल संपन्न हुआ। कार्यक्रम में उपस्थित दर्शकों एवं संगीत प्रेमियों को माँ गंगा की आध्यात्मिक महिमा, सांस्कृतिक चेतना और लोकजीवन की अनुभूतियों से भावविभोर कर दिया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता वी.पी श्रीवास्तव ने की, कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि महेश चंद्र चतुर्वेदी अपर महाधिवक्ता उत्तर प्रदेश,गरिमामई उपस्थति रही रतन चौधरी वरिष्ठ अधिवक्ता उच्च न्यायालय इलाहाबाद, डॉक्टर पी.के सिन्हा पूर्व मुख्य चिकित्साधिकारी, अरुण कुमार गुप्ता,(न्याय मित्र) वरिष्ठ अधिवक्ता उच्च न्यायालय इलाहबाद एवं विशिष्ट अतिथि प्रमोद द्विवेदी सहायक निदेशक (राज भाषा) एमएनआईटी कार्यक्रम में संरक्षक के रूप में अवधेश चंद गुप्ता, सुरेश चंद्र,सांस्कृतिक स्तंभ में प्रमोद पांडे,लाल यादव,मिठाई लाल अज़ूज,प्रदीप कुमार साही,एवं अशोक जैन की गरिमामयी उपस्थिति रही। मीडिया प्रभारी का दायित्व नरेंद्र कुमार ने निभाया तथा मंच संचालन उमेश चंद्र शुक्ला द्वारा प्रभावशाली ढंग से किया गया। कार्यक्रम में मुख्य स्वर के रूप में आशुतोष श्रीवास्तव ने माँ गंगा पर आधारित गीतों की अत्यंत भावपूर्ण प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। “मन में गंगा, मन में यमुना, मन संगम है जाना पुण्यदायिनी, पापनाशिनी,मैं हूँ गंगा। लोकतारिणी, दुखहारिणी, मैं हूँ गंगा ,मैं लोक जीवन का गीत लेकर,विकल धरा पर उतर चली हूँ…”तथा “गंगा हमको छोड़ कभी मत, इस धरती से जाना…” जैसे गीतों ने वातावरण को भक्तिमय एवं भावनात्मक बना दिया। कोरस में श्रेया गुप्ता, रिया एवं निहारिका ने अपनी मधुर स्वर सहभागिता दी। संगीत संयोजन में तबले पर बलराम मिश्रा, ढोलक पर विशाल प्रजापति, कीबोर्ड पर जयंतो बोस, साइड रिदम पर संजय श्रीवास्तव तथा वाराणसी से पधारे बांसुरी वादक शनिश ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुति से कार्यक्रम को विशेष ऊँचाई प्रदान की। कार्यक्रम के अंत में संस्था अध्यक्ष शरद चन्द्र श्रीवास्तव एवं संस्था सचिव श्वेता श्रीवास्तव द्वारा सभी अतिथियों, कलाकारों एवं उपस्थित जनसमूह के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।“गंगा की अविरल यात्रा” केवल एक सांगीतिक प्रस्तुति नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और प्रकृति के प्रति समर्पण का एक भावपूर्ण प्रयास सिद्ध हुई, जिसकी सराहना उपस्थित सभी दर्शकों ने मुक्त कंठ से की।







