VARANASI NEWS: हरिश्चंद्र पी. जी. कालेज के मनोविज्ञान विभाग में गाइडेंस एंड काउंसिलिगं सेल के तत्वावधान में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति छात्र- छात्राओं को जागरूक करने के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया । कार्यशाला का विषय था-“तनाव, चिंता एवं भावनात्मक स्वास्थ्य प्रबंधन की तकनीके कार्यक्रम का प्रारंभ मॉ सरस्वती एवं महाविद्यालय के संस्थापक भारतेन्दु बाबू हरिश्चंद्र की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करके किया गया। तत्पश्चात मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. ममता वर्मा ने मंचस्थ विद्वत जन एवं सभागार में उपस्थित सभी का स्वागत एवं अभिनंदन किया तथा विषय को स्थापित किया। इस अवसर पर मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए प्रो . वर्मा ने कहा कि आज समाज में द्रुत गति से परिवर्तन हो रहा है। जहाँ तकनीक हमें जोड़ रही है, वहीं कहीं न कहीं मनुष्य अपने स्वयं के मन से कटता जा रहा है। यही कारण है कि तनाव (Stress), चिंता (Anxiety) और भावनात्मक असंतुलन आज के समाज की मूक महामारियां बन गई हैं। उन्होंने तनाव, चिंता और भावनात्मक स्वास्थ्य किस प्रकार से मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं इस पर प्रकाश डाला। तनाव के लिए प्रो. वर्मा ने कहा कि जब चुनौतियाँ हमारे सामर्थ्य से उपर उठ जाए तो तनाव उत्पन्न होता है।सकारात्मक तनाव हमें लक्ष्य तक पहुँचने में मदद करता है जबकि नकारात्मक तनाव लम्बी अवधि तक जब हमारे भीतर संचित रह जाता है तो स्वास्थ्य को हानि पहुँचता है। इससे हाइपरटेंशन, डायबिटीज़, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, माइग्रेन आदि से व्यक्ति पीड़ित हो सकता है। इसलिए मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए यह आवश्यक है तनाव मुक्त, चिंता रहित एवं संतुलित भावनात्मक स्वास्थ्य के साथ जीवन जीने की क्षमता विकसित करें। इसके लिए हमें अपने कम्युनिकेशन स्किल, एक्सप्रेशन स्किल को बेहतर बनाना होगा।सूक्ष्म व्यायाम, प्राणायाम एवं मेडिटेशन को अपनी दिनचर्या में शामिल करना होगा । कार्यशाला की मुख्य वक्ता “ईरा त्रिपाठी“ मनोसामाजिक कार्यकर्ता यस. यस. पी.जी. मंडलीय हॉस्पिटल कबीरचौरा, वाराणसी, द्वारा मानसिक स्वास्थ्य प्रबंधन कार्यक्रम एवं सेवाओं के बारें में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। उन्होंने तनाव, चिंता और सांवेगिक स्वास्थ्य के बारे विस्तृत चर्चा की। जिसमें उन्होंने मानसिक गुणवत्तापूर्ण जीवन के लिए निम्न मानसिक स्थिति, समस्या और परेशानी, उत्पन्न होने के लिये नींद न आना, उदासी और मायूसी, व्यर्थ होने की भावना, किसी कार्य मे मन न लगना, आत्महत्या के विचार, आक्रमकता, आक्रोश, गुस्सा, बेहोशी, पैनिक अटैक, सिरदर्द, या भारीपन, बेवजह शक करना, साजिश एवं संज्ञानात्मक क्षमताओं की कमी मद्यपान, तथा मोबाइल फोन लत सोशल मिडिया एडिक्शन को मुख्य कारण के रूप मे शामिल किया। उन्होंने तनाव प्रबंधन में विशेष रूप से शैक्षणिक तनाव के लिए समय प्रबंधन, शारिरिक अभ्यास, ध्यान अभ्यास, योगा, एवं नई सकारात्मक आदतों के विकास को महत्वपूर्ण कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के उप-प्राचार्य प्रो. विश्वनाथ वर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज के समय में समाज में बड़ी संख्या मे युवा पीढ़ी मानसिक अस्वस्थता की शिकार है। इस प्रकार की कार्यशालाएँ अति- आवश्यक हैं जो विभिन्न प्रकार के मानसिक रोगों के विषय में, उनके लक्षणों, कारणों और उपचार के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी प्रदान करें और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग करें । कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का स्वागत मनोविज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ आशुतोष द्विवेदी एवं कार्यक्रम का संचालन डॉ वीरेंद्र पटेल ने किया
कार्यक्रम में प्रो. अनिल कुमार, प्रो. अनिता सिंह, डॉ देवेंद्र सिंह ,डॉ. ओमशर्मा, डॉ. अलका श्रीवास्तव, पवन सिंह , गणेश यादव, रुचि गुप्ता , महाविद्यालय परिवार के अन्य कर्मचारी एवं छात्र-छात्रायें उपस्थित रहे।







