“एयरड्रॉप नियुक्तियों” पर जताई आपत्ति, पारदर्शी और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया की मांग
PRAYAGRAJ NEWS: इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। एसोसिएशन ने राष्ट्रपति को पत्र भेजकर मांग की है कि हाईकोर्ट में केवल उन्हीं अधिवक्ताओं को न्यायाधीश नियुक्त किया जाए, जो लंबे समय से इलाहाबाद हाईकोर्ट में नियमित रूप से प्रैक्टिस कर रहे हैं। बार एसोसिएशन ने अन्य उच्च न्यायालयों, विशेषकर दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं की इलाहाबाद हाईकोर्ट में नियुक्ति पर आपत्ति जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि बाहरी अधिवक्ताओं की नियुक्ति से इलाहाबाद हाईकोर्ट के योग्य, अनुभवी और नियमित रूप से कार्यरत वकीलों की उपेक्षा हो रही है। HCBA ने कोलेजियम प्रणाली की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि हाल के वर्षों में कई ऐसे अधिवक्ताओं को न्यायाधीश नियुक्त किया गया, जिनका इलाहाबाद हाईकोर्ट में नियमित बहस या मामलों की फाइलिंग का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं रहा है। एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में पक्षपात और भाई-भतीजावाद की आशंका दिखाई देती है, जिससे न्यायपालिका की साख प्रभावित हो सकती है। पत्र में कहा गया है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और आम जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और योग्यता आधारित होनी चाहिए। एसोसिएशन ने “एयरड्रॉप नियुक्तियों” की परंपरा समाप्त करने की मांग करते हुए कहा कि स्थानीय अधिवक्ताओं के अनुभव और योगदान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। HCBA द्वारा यह पत्र राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश, केंद्रीय कानून मंत्री तथा इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजा गया है। एसोसिएशन ने उम्मीद जताई है कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा, ताकि न्यायपालिका में पारदर्शिता और विश्वास कायम रह सके।







