कब्र बन गया तालाब: हजारों मछलियां दफन, फिर भी खत्म नहीं त्रासदी
JHANSI NEWS: शहर के बीचों-बीच स्थित लक्ष्मी तालाब इन दिनों बदहाली और लापरवाही की जीती-जागती मिसाल बन गया है। तालाब में हजारों की संख्या में मछलियों की मौत ने न सिर्फ पर्यावरणीय संकट खड़ा कर दिया है, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की पोल भी खोल दी है। कई कुंतल मृत मछलियों को तालाब से निकालकर मिट्टी में दफनाया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद हालात इतने भयावह हैं कि तालाब में अब भी मृत मछलियां पानी की सतह पर तैरती नजर आ रही हैं और किनारों पर सड़ रही हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि तालाब के आसपास दुर्गंध फैल गई है, जिससे स्थानीय लोगों का जीना दूभर हो गया है। हैरानी की बात यह है कि कुछ लोग इन सड़ी-गली मछलियों को भी उठाकर अपने साथ ले जा रहे हैं, जो स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। क्षेत्रीय पार्षद राहुल कुशवाहा ने इस पूरे मामले में सफाई देते हुए कहा कि तालाब में अत्यधिक गंदगी और जलकुंभी जैसे पौधों के फैलाव के कारण जलस्तर कम हो गया, जिससे पानी में ऑक्सीजन की भारी कमी हो गई। इसी वजह से मछलियों की मौत हुई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार के केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया गया है। लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर तालाब की सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है? यदि गंदगी और जलकुंभी इतनी बढ़ गई थी तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था? स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सीधा-सीधा पर्यावरण के साथ खिलवाड़ है। यदि समय रहते सफाई अभियान चलाया जाता और तालाब की देखरेख की जाती, तो शायद हजारों मछलियों की जान बचाई जा सकती थी। फिलहाल लक्ष्मी तालाब की यह स्थिति प्रशासन के लिए एक बड़ा सवाल बन चुकी है—क्या जिम्मेदार अधिकारी इस “मौत के तालाब” को फिर से जीवित करने के लिए कोई ठोस कदम उठाएंगे, या यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?







