40 वर्षों से चल रही गंगा सप्तमी पर परिक्रमा की परंपरा, परिक्रमा पथ की उठी मांग
नवका बिहार कर कौशांबी के कुरई शीशम वाटिका पहुंचे भक्त, त्रेता युग की स्मृतियां हुईं जीवंत।
JHANSI NEWS: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की तपोस्थली श्रृंग्वेरपुर धाम में गुरुवार को गंगा सप्तमी के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा। श्रृंग्वेरपुर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एवं श्री तुलसी साहित्य प्रचार समिति के तत्वावधान में आयोजित 11 कोसी परिक्रमा अपने 40वें वर्ष में प्रवेश कर गई। भीषण गर्मी व दुर्गम रास्तों की परवाह किए बिना भक्तों ने जय श्री राम के जयकारों के साथ इस आध्यात्मिक यात्रा को पूरा किया। श्रृंग्वेरपुर धाम में 40 वर्षों से अनवरत चली आ रही इस परिक्रमा का शुभारंभ भगवती गंगा के विधि-विधान से पूजन के साथ हुआ। श्रृंग्वेरपुर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं परिक्रमा संचालक अरुण द्विवेदी ने बताया कि वैशाख शुक्ल सप्तमी (गंगा सप्तमी) का विशेष महत्व है। मान्यता है कि आज के दिन श्रृंग्वेरपुर धाम में समस्त देवी-देवता व चारों धामों का वास होता है, जिनकी परिक्रमा करने से अक्षय पुंय की प्राप्ति होती है। महंत श्रीराम प्रसाद दास शास्त्री महाराज की अगुवाई में परिक्रमा शांता श्रृंगी ऋषि मंदिर और श्रीराम संध्या मठ मंदिर से प्रारंभ हुई। भक्तगण संस्कृत महाविद्यालय, सूर्या भीटा, ऋषि तलैया होते हुए सीता कुंड पहुंचे, जहां नौकाओं के जरिए गंगा पार की गई। गंगा पार करते ही श्रद्धालुओं को त्रेता युग के उस दृश्य की अनुभूति हुई, जब प्रभु राम ने वनवास के दौरान निषादराज से विदा लेकर गंगा पार की थी। इसके पश्चात यात्रा कौशाम्बी के कुरई एवं शीशम वाटिका होते हुए पुनः संध्या मठ पर समाप्त हुई। श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा सुगम नहीं थी। शासन-प्रशासन की अनदेखी के कारण आज भी परिक्रमा पथ का निर्माण नहीं हो सका है। भक्तों को खेतों, खलिहानों, जंगलों, कटीले मार्गों से होकर गुजरना पड़ा। भीषण गर्मी और पैरों में चुभते कंकड़-पत्थरों और तपती रेत के बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। लोगों ने मांग किया है कि ऐतिहासिक यात्रा के लिए उचित परिक्रमा पथ का निर्माण कराया जाए। इस दौरान दौरान रामचंद्र यादव फौजी, डॉ. राजेश सोनी, मुन्ना सोनी, आकाश गुप्ता, मुनीश सिंह, कल्लू, राहुल सोनी, अंकित सोनी, उमेश त्रिपाठी, वैभव मिश्रा, गुड्डू माली असदि तमाम लोग उपस्थित रहे।







