LAKHIMPUR KHERI NEWS: गोला गोकर्णनाथ शिक्षा के मंदिर में ही जब छात्र के भविष्य से खिलवाड़ होने लगे तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजमी है। हैदराबाद थाना क्षेत्र के राम रतन शास्त्री महाविद्यालय, कोठी गनेशपुर से ऐसा ही एक मामला सामने आया है। लखनऊ विश्वविद्यालय से बीए की डिग्री जारी होने और सभी पेपर क्लियर होने के बावजूद कॉलेज प्रबंधन ने छात्र की टीसी, मार्कशीट और सरकार की मुफ्त स्मार्टफोन योजना का लाभ रोक रखा है।
5 हजार दो, तभी मिलेंगे कागज
पीड़ित छात्र मो. अनस खान पुत्र जावेद अली खान, निवासी सैय्यद वाड़ा, खीरी टाउन ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। छात्र का आरोप है कि कॉलेज का बाबू राजीव टीसी, मार्कशीट और डिजिशक्ति योजना के तहत मिलने वाले स्मार्टफोन के बदले सीधे 5 हजार रुपये की मांग कर रहा है।
मो. अनस ने जून 2025 में लखनऊ विश्वविद्यालय से अनुक्रमांक 2230471010035 के तहत बीए NEP की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की है। विश्वविद्यालय से डिग्री भी जारी हो चुकी है। इसके बावजूद कॉलेज प्रशासन दस्तावेज देने को तैयार नहीं है।
बदले की भावना से बिगाड़ा डेटा
छात्र का आरोप है कि जब उसने पैसे देने से इनकार किया तो बाबू राजीव ने बदले की भावना से डिजिशक्ति पोर्टल पर उसकी जन्मतिथि, ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर जानबूझकर गलत फीड कर दिए। इसी कारण छात्र का डेटा पोर्टल पर मैच नहीं कर रहा और मुफ्त स्मार्टफोन की प्रक्रिया अटक गई है।
हर छात्र से वसूली का आरोप
मो. अनस का कहना है कि यह उत्पीड़न केवल उसके साथ नहीं हो रहा। कॉलेज में बीए पास करने वाले हर छात्र से स्मार्टफोन और टीसी देने के नाम पर 5 हजार रुपये लिए जा रहे हैं। जो छात्र पैसा देने में असमर्थ हैं, उनके दस्तावेज रोक दिए जाते हैं। इससे उनका एक शैक्षणिक सत्र बर्बाद हो रहा है और वे किसी भी संस्थान में आगे दाखिला नहीं ले पा रहे।
करियर पर लगा ग्रहण, डीएम से लगाई गुहार
टीसी व मार्कशीट न मिलने के कारण मो. अनस स्नातकोत्तर या किसी अन्य कोर्स में प्रवेश नहीं ले पा रहा है। छात्र ने बताया, “एक तरफ मेरे हाथ में लखनऊ विश्वविद्यालय की डिग्री है, दूसरी तरफ कॉलेज के कारण मेरा साल बर्बाद हो रहा है। न आगे पढ़ पा रहा हूं, न कहीं नौकरी के लिए आवेदन कर पा रहा हूं।” छात्र ने जिलाधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उसने प्रार्थना पत्र में अपनी टीसी, मार्कशीट और स्मार्टफोन दिलवाने के साथ ही दोषी बाबू राजीव और कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
शिक्षा विभाग की भूमिका पर सवाल
इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला, जब सरकार डिजिशक्ति योजना के तहत छात्रों को मुफ्त स्मार्टफोन दे रही है तो कॉलेज किस नियम के तहत 5 हजार रुपये वसूल रहा है? दूसरा, जब छात्र ने विश्वविद्यालय से परीक्षा पास कर ली और डिग्री जारी हो गई तो कॉलेज को मूल दस्तावेज रोकने का अधिकार किसने दिया?
नियमानुसार, परीक्षा परिणाम घोषित होने और कोई बकाया न होने पर कॉलेज को छात्र की टीसी व मार्कशीट तत्काल देनी होती है। दस्तावेज रोकना यूजीसी की गाइडलाइन का खुला उल्लंघन है।
अभिभावकों में आक्रोश, कार्रवाई का इंतजार
मामला सामने आने के बाद अन्य छात्रों और अभिभावकों में भी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि गरीब छात्रों से इस तरह अवैध वसूली करना शर्मनाक है। फिलहाल शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई न होने से छात्रों की चिंता बढ़ गई है। अब सबकी निगाहें जिलाधिकारी कार्यालय पर टिकी हैं। देखना होगा कि डीएम के संज्ञान में मामला आने के बाद दोषी कॉलेज प्रशासन पर क्या कार्रवाई होती है और छात्र मो. अनस को कब तक न्याय मिलता है।







