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फ़र्श से अर्श तक: दर्द, संघर्ष और हिम्मत की मिसाल बनीं सविता प्रधान, IAS

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प्रयागराज/नई दिल्ली। विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत न हारने का जज़्बा इंसान को किस ऊंचाई तक पहुंचा सकता है, इसका जीवंत उदाहरण हैं सविता प्रधान। घरेलू हिंसा, अपमान और जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजरने के बाद उन्होंने न सिर्फ खुद को संभाला, बल्कि देश की प्रतिष्ठित सिविल सेवा में स्थान हासिल कर एक नई पहचान बनाई।

महज 16 वर्ष की आयु में सविता प्रधान की शादी हो गई थी। शुरुआती दिनों से ही उनकी वैवाहिक जिंदगी कष्टों से भरी रही। पति द्वारा मारपीट, अपमान और मानसिक उत्पीड़न उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया था। ससुराल में उन्हें बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ता था। कई बार हालात इतने बदतर हो जाते कि उन्हें भूखे पेट रहना पड़ता था और छुपकर खाना खाना पड़ता था।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब अत्याचार लगातार बढ़ता गया। शारीरिक हिंसा के निशान उनके शरीर पर साफ दिखाई देते थे। एक समय ऐसा आया जब उन्होंने जीवन से हार मानने का फैसला कर लिया। दो बच्चों की मां बनने के बावजूद उन्हें कोई सहारा नजर नहीं आ रहा था। एक दिन उन्होंने आत्महत्या का प्रयास किया, लेकिन अंतिम क्षणों में उन्होंने खुद को रोक लिया। यही पल उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।

इसके बाद सविता ने हिम्मत जुटाई और ससुराल छोड़कर नई जिंदगी की शुरुआत की। उन्होंने छोटे-छोटे काम करते हुए अपने बच्चों की परवरिश की और साथ ही पढ़ाई जारी रखी। पार्लर में काम करने से लेकर ट्यूशन पढ़ाने तक, हर संभव प्रयास उन्होंने किया। हालांकि अलग होने के बाद भी उन्हें कई बार उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर सविता ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (PCS) परीक्षा पहले ही प्रयास में पास की और सरकारी अधिकारी बनीं। इसके बाद उन्होंने UPSC Civil Services Examination की तैयारी शुरू की। वर्ष 2017 में उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार सफलतापूर्वक पार करते हुए IAS बनने का सपना साकार किया।

आज सविता प्रधान एक सफल IAS अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। वे अपने पद का उपयोग विशेष रूप से गरीब, वंचित और महिलाओं के उत्थान के लिए कर रही हैं। शिक्षा और आत्मनिर्भरता के माध्यम से समाज में बदलाव लाने का उनका प्रयास सराहनीय है।

उनकी कहानी यह साबित करती है कि कठिनाइयाँ चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर हौसला मजबूत हो तो सफलता जरूर मिलती है।