KAUSHAMBI NEWS: शिक्षा केवल अक्षरों का ज्ञान नहीं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास की आधारशिला है। इसी उद्देश्य को साकार करने के लिए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), मंझनपुर में ‘स्कूल रेडीनेस फेज-2’ की दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें जनपद के नोडल शिक्षक संकुलों ने प्रतिभाग कर प्राथमिक शिक्षा को सुदृढ़ बनाने पर मंथन किया।
कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों को विद्यालयी वातावरण के प्रति सहज बनाना और प्रारंभिक स्तर पर उनके मानसिक व शारीरिक विकास को प्रोत्साहित करना रहा। डायट प्राचार्य निधि शुक्ला ने कहा कि बाल्यकाल की शिक्षा ही भविष्य की मजबूत नींव है और यदि प्रारंभिक स्तर पर बच्चों को सही दिशा दी जाए तो ‘निपुण भारत’ मिशन को हासिल करना सहज हो जाएगा। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे बच्चों को खेल-खेल में सीखने का अवसर दें, जिससे वे विद्यालय को बोझ नहीं बल्कि आनंद का केंद्र समझें। नोडल प्रवक्ता धीरज ने कहा कि आंगनवाड़ी या घर के खुले माहौल से आने वाले बच्चे स्कूल के अनुशासन से घबरा जाते हैं, ऐसे में ‘स्कूल रेडीनेस’ कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उनके मन से भय को दूर करना है। खेल, संगीत, कहानियों और गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को सीखने से जोड़ना जरूरी है, ताकि वे सहज रूप से शिक्षा ग्रहण कर सकें। वहीं नोडल एसआरजी डॉ. ओम प्रकाश सिंह ने बताया कि कक्षा-1 में प्रवेश से पहले बच्चों में प्री-स्कूल स्किल विकसित करना बेहद आवश्यक है, क्योंकि यही कौशल आगे की शिक्षा का आधार तैयार करते हैं। कार्यशाला के दौरान शिक्षकों को ‘स्कूल रेडीनेस मैनुअल’ और वार्षिक कैलेंडर उपलब्ध कराया गया, जिससे वे विद्यालयों में गतिविधियों को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें। समापन सत्र में संजय सिंह, भार्गव यादव, उषा देवी समेत अन्य शिक्षकों की उपस्थिति रही, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सभी एक साझा लक्ष्य को लेकर कार्य कर रहे हैं। दो दिवसीय इस कार्यशाला के बाद जनपद के प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा को रोचक और प्रभावी बनाने की दिशा में ठोस पहल शुरू होने की उम्मीद है।







