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सेरेब्रल पाल्सी प्रभावित बच्चों ने खेली फूलों से होली त्रिशला फाउंडेशन ने रचा संवेदनशीलता का यादगार उत्सव

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थैरेपी,पुनर्वासक्ष, अभ्यास, भावनात्मक सहयोग से बच्चों की क्षमताएं होती है विकसित : डा जितेन्द्र जैन

प्रयागराज। त्रिशला फाउंडेशन की ओर से सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों के जीवन में आत्मविश्वास, सम्मान और खुशियों के रंग भरने के उद्देश्य से होली मिलन समारोह का आयोजन रविवार को कर्नलगंज इंटर कॉलेज मैदान, टैगोर टाउन में हर्षोल्लास और भावनात्मक वातावरण में संपन्न हुआ।
यह आयोजन केवल होली का पर्व नहीं रहा, बल्कि समावेशन, संवेदना और सामाजिक एकता का एक सशक्त संदेश बनकर उभरा। कार्यक्रम में सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों, उनके अभिभावकों, त्रिशला फाउंडेशन परिवार एवं शहर के अनेक गणमान्य शुभचिंतकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। पूरे परिसर में वृंदावन की परंपरा के अनुसार फूलों की होली ने भक्तिमय और आनंदमय वातावरण बना दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ त्रिशला फाउंडेशन के कोषाध्यझ रमाशंकर ने मंच से उपस्थित सभी लोगों को वैदिक मंत्रोचारण से आशीर्वाद प्रदान किया। त्रिशला फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. जितेन्द्र कुमार जैन एवं सचिव डॉ. वारिदमाला जैन ने बच्चों एवं अभिभावकों को आशीर्वचन एवं प्रेरणादायी संबोधन के साथ किया। दोनों पदाधिकारियों ने अभिभावकों के संघर्ष, धैर्य और समर्पण की सराहना करते हुए बच्चों को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने का संदेश दिया।
आशीर्वाद के बाद कार्यक्रम ने सांस्कृतिक रंगों की सुंदर उड़ान भरी। मंचीय प्रस्तुतियों की शुरुआत गणेश वंदना से हुई, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों ने अपनी प्रतिभा का अद्भुत प्रदर्शन किया। बच्चों के डांस, ग्रुप डांस, गायन, शायरी, चुटकुलें विशेषतः सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित कृष्णा विट्ठल साकरे ने रैपिंग और बीट बॉक्सिंग जैसे अद्भुत प्रदर्शन से सभी का दिल जीत लिए और यह सिद्ध कर दिया कि प्रतिभा किसी शारीरिक सीमा की मोहताज नहीं होती। सेरेब्रल पाल्सी बच्चों एवं उनके अभिभावकों के जीवन के संघर्ष पर आधारित एक नाटक भी प्रस्तुत किया गया जिसने सभी की आखें नम कर दी एवं होली की विशेष जोगीरा गायन ने भी लोगों का खूब मनोरंजन किया।
कार्यक्रम का एक अत्यंत भावनात्मक और विशिष्ट आकर्षण यह रहा कि देश के विभिन्न राज्यों से आए अभिभावकों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम, जिनमें उन्होंने अपने-अपने प्रदेश की संस्कृति, लोकनृत्य और परंपराओं को मंच पर जीवंत किया। इन प्रस्तुतियों ने “एक भारत–श्रेष्ठ भारत” की भावना को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया और दर्शकों की खूब सराहना प्राप्त की।
फूलों की होली बनी कार्यक्रम की आत्मा – सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों द्वारा खेली गई फूलों की होली, जिसने मंच को मानो वृंदावन की होली में परिवर्तित कर दिया। रंग-बिरंगे फूलों, उर्जावान संगीत और बच्चों की मुस्कान ने अतिथियों और अभिभावकों को भावनाओं से भर दिया। यह दृश्य प्रयागराज में आयोजित त्रिशला फाउंडेशन के इस मंच को विशेष पहचान दे गया।
इस अवसर पर अध्यक्ष डॉ. जितेन्द्र कुमार जैन ने बताया कि “त्रिशला सीपी विलेज – फेज़ 1” का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुका है। साथ ही, सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों के पुनर्वास के विभिन्न तरीकों की समुचित सुविधाओं से सुसज्जित एवं आवासीय व्यवस्था वाले “त्रिशला सीपी होम” की शुरुआत इसी वर्ष किए जाने की योजना है। उन्होंने बताया कि सीपी गांव के संचालन की जिम्मेदारी, पूर्व से कार्य देख रहे रविंद्र एवं प्रदीप शुक्ल के साथ-साथ दिव्यांगता के क्षेत्र में कार्यरत राष्ट्रीय संस्था “सक्षम” के पूर्व राष्ट्रीय सचिव कमलाकांत को सौंपी गई है। इस अवसर पर फाउंडेशन ने अपने नए “त्रिशला फाउंडेशन मोबाइल ऐप” की भी जानकारी दी गई, जिसकी शुरुआत वर्ष 2026 में कर दी गई है। यह मोबाइल ऐप फाउंडेशन में पंजीकृत बच्चों एवं उनके अभिभावकों को इलाज से संबंधित संपूर्ण जानकारी, ग्रोथ मॉनिटरिंग, थेरेपी एवं प्रगति रिपोर्ट, परामर्श, फीडबैक, कार्यक्रमों तथा निःशुल्क चिकित्सा शिविरों की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराता है। इस ऐप के माध्यम से अभिभावक ना केवल अपने बच्चे के उपचार की नियमित निगरानी कर सकते हैं, बल्कि फाउंडेशन के डॉक्टरों एवं अधिकारियों से सीधे संपर्क कर बेहतर एवं समयबद्ध उपचार भी सुनिश्चित कर सकते हैं।
त्रिशला फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. जितेन्द्र कुमार जैन ने कहा कि जब हमारे बच्चे मंच पर नृत्य करते हैं, गीत गाते हैं और फूलों से होली खेलते हैं, तब केवल रंग नहीं उड़ते, समाज की वर्षों पुरानी सोच भी बदलती है। चिकित्सकीय रूप से सेरेब्रल पाल्सी को एक चुनौती माना जाता है, लेकिन सही समय पर थैरेपी, पुनर्वास, निरंतर अभ्यास और भावनात्मक सहयोग से इन बच्चों की क्षमताएं अद्भुत रूप से विकसित हो सकती हैं। यह कार्यक्रम इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब चिकित्सा, परिवार और समाज एक साथ खड़े होते हैं, तो ये बच्चे हर क्षेत्र में चमक सकते हैं और आत्मनिर्भर जीवन की ओर आगे बढ़ सकते हैं।”
संस्था की सचिव डॉ. वारिदमाला जैन ने कहा कि यह होली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए आशा, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का उत्सव है। एक चिकित्सक के रूप में हम जानते हैं कि दवाओं और थैरेपी के साथ-साथ भावनात्मक सुरक्षा, सामाजिक स्वीकृति और निरंतर प्रोत्साहन भी उतने ही आवश्यक हैं। जब समाज इन बच्चों को अपनाता है, तब उनका उपचार और विकास दोनों और प्रभावी हो जाता है। समाज का साथ, अभिभावकों का धैर्य और बच्चों का साहस—यही हमारी सबसे बड़ी ताकत और प्रेरणा है।”