जनपदीय सत्यापन समिति की बैठक में पांच मामलों की सुनवाई
KUSHINAGAR NEWS: जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में जनपदीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), तहसीलदार कप्तानगंज, तहसीलदार तमकुही तथा जिला समाज कल्याण अधिकारी (सदस्य/सचिव) सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में जनपद के पांच प्रकरणों की सुनवाई की गई। जिलाधिकारी ने प्रत्येक मामले में पक्ष एवं विपक्ष को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित तहसीलदारों को निर्देशित किया कि जाति संबंधी विवादों का निस्तारण पूरी पारदर्शिता एवं सामाजिक-प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जाति प्रमाण पत्र हेतु प्राप्त आवेदनों एवं विवादित प्रकरणों में तहसीलदार स्वयं स्थलीय जांच करें तथा आवेदक के पारिवारिक, सामाजिक एवं वैवाहिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए शासनादेशों के अनुरूप निर्णय लें। जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिए कि यदि किसी आवेदन को स्वीकृत अथवा निरस्त किया जाता है तो उसके स्पष्ट एवं ठोस कारण अभिलेखों में अंकित किए जाएं, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की भ्रांति न रहे। उन्होंने बताया कि कई बार जाति प्रमाण पत्र से संबंधित प्रकरणों में वादी अथवा प्रतिवादी ‘जनता दर्शन’ अथवा ‘समाधान दिवस’ में शिकायत करते हैं, जबकि यह निर्धारित प्रक्रिया नहीं है। ऐसे मामलों के निस्तारण के लिए शासन द्वारा स्पष्ट अपील व्यवस्था निर्धारित की गई है। जिलाधिकारी ने जनसामान्य को अवगत कराया कि यदि किसी व्यक्ति का जाति प्रमाण पत्र निर्गत नहीं हो रहा है अथवा किसी अन्य के प्रमाण पत्र पर आपत्ति है, तो वह निर्धारित प्रारूप पर जनपदीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति के समक्ष अपील कर सकता है। समिति के निर्णय से असंतुष्ट होने पर मण्डलीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति (अध्यक्षता—मंडलायुक्त) के समक्ष अपील की जा सकती है। इसके बाद भी असंतोष की स्थिति में राज्य स्तर पर प्रमुख सचिव, समाज कल्याण की अध्यक्षता में गठित राज्य जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति के समक्ष अपील का प्रावधान है। अंतिम रूप से संबंधित पक्ष माननीय उच्च न्यायालय की शरण ले सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जाति प्रमाण पत्र से जुड़े सभी मामलों का निस्तारण निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप ही किया जाएगा।







