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रिंगवा मोड़ से लालापुर मार्ग बना मौत का कुंआ, प्रशासन मौन। टिकरी के पास ‘खूनी गड्ढा’ से दहशत, ग्रामीणों ने पत्थर डालकर दी चेतावनी

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बारा, प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र की बारा तहसील अंतर्गत रिंगवा मोड़ से लालापुर को जोड़ने वाला संपर्क मार्ग आज विकास के दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है। यह सड़क,जो कभी क्षेत्रीय आवागमन की जीवनरेखा मानी जाती थी,अब जगह-जगह उभरे गहरे, चैड़े और खतरनाक गड्ढों के कारण भय और असुरक्षा का पर्याय बन चुकी है। जमीनी पड़ताल में सामने आया कि सड़क की ऊपरी परत पूरी तरह उखड़ चुकी है। डामर बिखर चुका है,और बीच मार्ग में बने गहरे गड्ढे किसी भी क्षण वाहन चालकों का संतुलन बिगाड़ सकते हैं। विशेष रूप से टिकरी ग्राम सभा के समीप बना विशाल गड्ढा सबसे अधिक खतरनाक स्थिति में है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार यह गड्ढा अचानक बना और दिनोंदिन और गहरा होता जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से कोई ठोस मरम्मत कार्य नहीं किया गया। स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ग्रामीणों ने स्वयं पहल करते हुए गड्ढे के भीतर एक बड़ा पत्थर डाल दिया है, ताकि दूर से आने वाले वाहन चालक सतर्क हो सकें। यह पत्थर प्रशासन के लिए एक मौन चेतावनी भी हैकृकि सड़क अब दुर्घटना की दहलीज पर खड़ी है। इस मार्ग से प्रतिदिन स्कूली छात्र-छात्राएं, किसान अपनी उपज लेकर बाजार जाने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली, दुपहिया वाहन चालक और स्थानीय व्यापारी गुजरते हैं। रात के समय प्रकाश व्यवस्था के अभाव में यह गड्ढा और भी जानलेवा साबित हो सकता है। बरसात में पानी भरने पर इसकी गहराई का अनुमान लगाना लगभग असंभव हो जाएगा, जिससे किसी भी क्षण बड़ी दुर्घटना घट सकती है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार मौखिक और लिखित शिकायतें की गईं, परंतु मरम्मत के नाम पर केवल आश्वासन ही मिला। सवाल यह उठता है कि क्या किसी अनहोनी के बाद ही विभाग जागेगा? क्या जनजीवन की सुरक्षा से बड़ा कोई और मुद्दा है? रिंगवा मोड़ से लालापुर मार्ग की यह बदहाली केवल एक सड़क की समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता की परीक्षा है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी समय रहते कार्रवाई कर जनता की जान- माल की रक्षा करते हैं या फिर यह ‘खूनी गड्ढा’ किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बनकर व्यवस्था को कठघरे में खड़ा करेगा।