PRAYAGRAJ NEWS: रमज़ान मुबारक में अल्लाह के फरमान से रोज़ा रखने के बहुत से फायदें हैं जिसमें भूख और प्यास की शिद्दत को महसूस करते हुए जहां अपने कमतर को याद रखने का माद्दा पैदा करता है वहीं शरीर की आंतरिक एक्सरसाइज तो होती ही है साथ ही पेट में मौजूद हानिकारक अपशिष्ट को समाप्त कर शरीर को चुस्त दुरुस्त बनाने का माध्यम भी होता है। माहे रमज़ान के नौ रोज़े और दूसरे जुमा पर शहर भर की तीन सौ से अधिक छोटी बड़ी मस्जिदों में जुमे की नमाज़ अदा करने के साथ अय्याम ए रमज़ान के पहले अशरे के नौ रोज़े मुकम्मल होने पर मुस्लिमों ने शुक्र ए खुदा का सजदा कर रहमत ए खुदा की क़ुरबत हासिल की।चौक जामा मस्जिद ,शिया जामा मस्जिद चक ज़ीरो रोड,मस्जिद ए खदीजा करैली ,मस्जिद अबु बकर सिद्दीक ,मस्जिद वसी उल्लाह रौशन बाग़ ,हरी मस्जिद धोबी घाट सिविल लाइन्स,मस्जिद खानकाह दायरा शाह अजमल सहित सभी मस्जिदों में जुमे पर भारी भीड़ जुटी और बारगाहे खुदावन्दी में शुक्र का सजदा किया।बाद नमाज़ मग़रिब अज़ान सुनते ही लोगों ने रोज़ा खोला और मुल्क में अमन चैन भाई चारा रोज़गार में बरकत ,मरहूमीन की मग़फिरत ,बिमारों के लिए सेहतयाबी की दुआ मांगी।मस्जिदों में जुमे की नमाज़ के बाद ओलमा ने अपने ख़ुत्बे में माहे रमज़ान की फजीलत बयान की तो ईशां की नमाज़ के साथ सुन्नी समुदाय ने विशेष दसवीं तरावी मुकम्मल की।
बाज़ारों में खरीदारों की उमड़ी भीड़
जैसे जैसे माहे रमज़ान के दिन बीत रहे हैं।वैसे वैसे बाजारों में रौनक़ देखने लायक़ है।सबसे अधिक भीड़ इन दिनों कपड़ों की दुकानों पर देखी जा रही है ताकि वक़्त पर टेलर कपड़े सिल कर दें सकें।उम्मुल बनींन सोसायटी के महासचिव सैय्यद मोहम्मद अस्करी के अनुसार दूसरी जिस चीज़ की खरीदारी अधिक हो रही है और इफ़्तारी का वह प्रमुख पसंदीदा चीज़ हैं वह है फल जिसमे सेब, केला,अंगूर,संतरा,खरबूज़ा और तरबूज़ हैं।धीरे धीरे ठण्ड कम हो रही है और दिन में तपिश बढ़ रही है तो अब इफ़्तारी शरबत का चलन भी शुरू हो गया है।
छै वर्शीय अलीज़ा ज़हरा ने रखा पहला रोज़ा
वसूदा विहार अपार्टमेंट कालिंदीपुरम प्रयागराज के रहने वाले ताहिर हुसैन जो की हाई कोर्ट में एक अधिकारी पद पर हैं उनकी छै वर्शीय बेटी अलीज़ा ज़हरा ने अपने माता पिता से ज़िद कर पहला रोज़ा रखा।ब्लेज़ चिल्ड्रेन स्कूल में यू के जी की छात्रा अलीज़ा जहां दिल लगा कर पढ़ाई करती हैं वहीं मां बाप की तरबीयत से मज़हबी रुझान भी रखती हैं।उनके रोज़ा रखने पर घर में तरहां तरहां के पकवान बने और सब ने एक साथ बैठ कर छोटी बच्ची की हौसला-अफजाई करते हुए रोज़ा खुलवा कर तोहफा दिया।







