PRAYAGRAJ NEWS: माहे रमज़ान में तीस दिनों तक लगातार भूख और प्यास पर काबू रखकर यह एहसास करना चाहिए कि कैसे भूख और प्यास को बर्दाश्त करते होंगे वह ग़रीब ओ ग़ुरबा जिनके पास एक वक्त का खाना भी मय्स्सर नहीं।माहे रमज़ान के रोज़े अल्लाह के लिए भूखा रहना नहीं बल्की एहसास करना और हर लम्हा अपने आस पास पड़ोसी ज़रुरतमन्दों ग़रीब मिसकीन यतीम के बारे में सोचने और उनकी गिज़ा का इंतेज़ाम करने का फरीज़ा सिखाता है। दरियाबाद स्थित मस्जिद अरब अली खान के पेश इमाम मौलाना इरफान हैदर जैदी ने उक्त बयान ज़ोहर की नमाज़ के बाद नमाज़ियों के बीच कही।कहा आप के घर में हर ग़िज़ा मुहैय्या होने के बाद जब आप भूखे होंगें और आप के सामने कोई भूखा आएगा तो आप को उसकी भूख और प्यास का एहसास होगा और आप उसकी मदद ज़रुर करेंगे।इसी माहे रमज़ान में ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की मदद करने वालों को अल्लाह ताआला की तरफ से तीस रोज़े मुकम्मल होने पर ईद उल फितर का तोहफा मिलता है।
फात्मा वेलफेयर सोसाइटी ने माहे रमज़ान में नेकी बटोरने को खोले दिल के ख़ज़ाने
फात्मा वेलफेयर सोसायटी की ओर से प्रतिदिन महिलाओं व पुरुषों का अलग अलग रोज़ा खोलने का इन्तेज़ाम किया जा रहा है।नाज़ की रसोई की तरफ से फात्मा वेलफेयर सोसाइटी की संयोजक डॉ नाज़ फात्मा ने दस रुपये में भरपेट भोजन की शुरुआत की थी जिसके दो सौ पंद्रह दिन हो गए थे ऐसे में रमज़ान के रोज़े को देखते हुए इस भरपेट भोजन की योजना को इफ़्तारी और रात्रि के खाने में तब्दील कर दिया गया।जहां प्रतिदिन दो सौ से ढ़ाई सौ लोगों को निशुल्क इफ़्तारी और खाने का बन्द पैकेट मुहैय्या कराने के साथ महिलाओं और पुरुषों का अलग अलग स्थान पर रोज़ा इफ्तार कराया जा रहा है। सैय्यद मोहम्मद अस्करी के अनुसार इफ़्तारी में जहां पकौड़ी ,चना ,मटर पापड़ ,फल और शर्बत की व्यवस्था रहती है वहीं रात्रि के भोजन पैकेट में पूड़ी कचौड़ी ,हलवा के साथ कभी कड़ी चावल कभी राजमा चावल कभी छोला भटूरा परोसा जाता है।







