Home उत्तर प्रदेश संत गाडगे बाबा को दिया जाये भारत रत्न रू अनन्त कुमार

संत गाडगे बाबा को दिया जाये भारत रत्न रू अनन्त कुमार

संत गाडगे बाबा की 150 जयंती धूमधाम से मनायी गयी
PRAYAGRAJ NEWS:  संत गाडगे बाबा की 150 जयंती समारोह नया पुरवा,स्टेनली रोड में आज केक काटकर  धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम में वरिष्ठ समाजसेवी अनन्त कुमार चैधरी ने कहा कि सन्त गाडगे जी को भारत रत्न मिलना चाहिए। उन्होंने समाज सेवा से देश को एक नयी दिशा दी है, केंद्र सरकार से अनुरोध है कि संत गाडगे बाबा ने अपना पूरा जीवन समाज में व्याप्त अज्ञानता, अंधविश्वास, भोली-भाली मान्यताओं, अवांछित रीति – रिवाजों और परंपराओं को दूर करने के लिए समर्पित कर दिया था । इसके लिए उन्होंने कीर्तन का मार्ग अपनाया। अपने कीर्तन में वह श्रोताओं को उनके अज्ञान, दोषों और दोषों से अवगत कराने के लिए विभिन्न प्रश्न पूछते थे। उनके उपदेश भी सरल और सहज होते थे। अपने कीर्तन में वह कहा करते थे कि चोरी मत करो, साहूकारों से कर्ज मत लो, व्यसनों में लिप्त मत हो, भगवान और धर्म के नाम पर जानवरों को मत मारो, जातिगत भेदभाव और छुआछूत का पालन मत करो। उन्होंने आम लोगों के मन में यह बात बैठाने की कोशिश की कि भगवान पत्थर में नहीं बल्कि इंसानों में हैं। वह संत तुकाराम महाराज को अपना गुरु मानते थे। उन्होंने हमेशा कहा कि श्मैं किसी का गुरु नहीं हूं, मेरा कोई शिष्य नहीं हैश्। अपने विचारों को सरल और भोले-भाले लोगों तक पहुँचाने के लिए वे ग्रामीण भाषा (मुख्य रूप से वरहाड़ी बोली) का प्रयोग करते थे। गाडगे बाबा ने भी समय-समय पर संत तुकाराम के सटीक अभंगों का भरपूर उपयोग किया। गाडगे बाबा भोले-भाले से लेकर नास्तिक तक सभी उम्र के लोगों को आसानी से अपने कीर्तन में शामिल कर लेते हैं और उन्हें अपने दर्शन का विश्वास दिलाते हैं। बाबा के जीवनीकार प्रबोधंकर ठाकरे ने कहा कि उनके कीर्तन का लघुचित्र बनाना मेरी शक्ति से परे है,अगर कोई मुसीबत में था तो उसकी मदद के लिए दौड़ना, उसकी मदद करना और बिना किसी परिणाम की उम्मीद किए अपने रास्ते पर जाना उसका पैटर्न था। वह हमेशा अपने साथ एक कौवा रखते थे। वह फटे-पुराने कपड़े पहने और हाथ में टूटी बंदूक थी इसीलिए लोग उन्हें श्गाडगे बाबाश् कहने लगे। वह जिस गाँव में जाते थे  झाडू-पोंछा करते थे। सार्वजनिक स्वच्छता के सिद्धांतों को मन में बिठाने और समाज में अंधविश्वास को खत्म करने के लिए वे खुद भी लगातार सक्रिय रहे और भरसक प्रयास किया। इस दौरान वरिष्ठ समाजसेवी अनंत कुमार चैधरी, शंभू शाहू, आनंद कुमार सिंह, विकास यादव, संदीप चैधरी, दीपक यादव, अरूण चैधरी, राम शेखर सहित अन्य ने विचार व्यक्त किया।