BHADOHI NEWS: भदोही रेलवे स्टेशन शहर का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जो सालाना 5 से 8 करोड़ रुपए का राजस्व देता है। इसके बावजूद, यह स्टेशन आज भी केवल 40-45 ट्रेनों के ठहराव तक सीमित है। वहीं, तीसरी श्रेणी का ज्ञानपुर रोड स्टेशन 80-85 ट्रेनों को रोकता है, जिससे भदोही के यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। भदोही को औद्योगिक कालीन नगरी और श्डॉलर नगरीश् के नाम से भी जाना जाता है। भारत से दुनिया भर में निर्यात होने वाले कालीनों का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा इसी शहर से निर्यात होता है। यह उद्योग भदोही के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों और दूसरे राज्यों के लोगों को भी रोजगार प्रदान करता है। औद्योगिक महत्व के कारण इस शहर में बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना लगा रहता है। हालांकि, यहां से विभिन्न शहरों के लिए जाने वाली ट्रेनों का अभाव है। कई महत्वपूर्ण ट्रेनें इस रेलवे स्टेशन पर बिना रुके बनारस, प्रयागराज और लखनऊ की ओर निकल जाती हैं, जिससे स्थानीय यात्रियों को मुगलसराय या प्रयागराज जाकर ट्रेन पकड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है। युवा समाजसेवी अर्सलान सायरा ने बताया कि भदोही रेलवे स्टेशन से कम ट्रेनों का चलना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मौजूदा सांसद, विधायक और तीन बड़े उद्योग संगठनों-सीईपीसी, एकमा और एसिसडा द्वारा ट्रेनों के ठहराव और नई ट्रेनों के संचालन के लिए पर्याप्त प्रयास न किए जाने पर चिंता व्यक्त की। अर्सलान ने पूर्व भदोही सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त का उदाहरण दिया, जिन्होंने 24 घंटे के भीतर एक प्रमुख ट्रेन और 15 दिनों में दूसरी ट्रेन का ठहराव सुनिश्चित करवाया था। उनके प्रयासों से मरुधर और हावड़ा-बीकानेर जैसी ट्रेनें भदोही में रुकने लगी थीं, जिससे यह साबित हुआ कि सांसद का पद जनता के हक की लड़ाई लड़ने के लिए है। उन्होंने यह भी बताया कि स्टेशन पर आज तक स्वचालित सीढ़ी (एस्केलेटर) और लिफ्ट जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। डिजिटल अनाउंसमेंट सिस्टम और कोच डिस्प्ले बोर्ड जैसे आधुनिक संसाधन होने के बावजूद, यात्रियों को अक्सर पुरानी घोषणा प्रणाली पर ही निर्भर रहना पड़ता है, जिससे उन्हें सही जानकारी मिलने में परेशानी होती है।







