पत्नी को पति जैसी जीवनशैली जीने का अधिकार
नौकरीपेशा महिला भी भरण-पोषण पाने की हकदार
माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पारिवारिक कानून से जुड़े एक अहम मामले में यह स्पष्ट किया है कि केवल पत्नी के नौकरीपेशा होने मात्र से उसका भरण-पोषण का अधिकार समाप्त नहीं हो जाता।
कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बिंदु:
▪️ भरण-पोषण (Maintenance) का उद्देश्य पत्नी को मात्र जीवित रखना नहीं, बल्कि उसे पति के सामाजिक व आर्थिक स्तर के अनुरूप सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है।
यदि पत्नी की आय कम है और वह पति की जीवनशैली के स्तर पर जीवनयापन करने में असमर्थ है, तो वह भरण-पोषण की मांग कर सकती है।
न्यायालय ने यह भी कहा कि पत्नी की आय, पति की आय से तुलनीय नहीं है तो पति की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती।
भरण-पोषण तय करते समय पति-पत्नी दोनों की आय, खर्च, सामाजिक स्थिति, आवश्यकताएं और जीवनशैली को ध्यान में रखा जाना आवश्यक है।
यह फैसला धारा 125 दं०प्र०सं० (CrPC) एवं पारिवारिक कानून की मूल भावना के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से असहाय होने से बचाना है।
यह निर्णय उन पतियों के लिए स्पष्ट संदेश है जो केवल पत्नी की नौकरी का हवाला देकर भरण-पोषण से बचने का प्रयास करते हैं।
यह फैसला महिला अधिकारों, समानता और न्याय को मजबूती प्रदान करता है।
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