दावत-ए-इस्लामी के मदरसों में दीनी तालीम की बड़ी कामयाबी, रूहानी माहौल में हुआ सम्मान समारोह
FATEHPUR NEWS: दावत-ए-इस्लामी इंडिया के तहत बिन्दकी में संचालित पार्ट टाइम मदरसा फ़ैज़ान-ए-वारिस-ए-पाक और फ़ैज़ान-ए-गरीब नवाज़ में बुधवार की रात उस समय खुशी और रूहानियत का माहौल बन गया जब पाँच बच्चों ने हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन मुकम्मल किया और ग्यारह बच्चों ने नाज़रा क़ुरआन पूरा कर लिया। इस मौके पर बच्चों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
यह कार्यक्रम बिन्दकी नगर के मोहल्ला कजियाना, निजामी चौराहे पर आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में अभिभावक, समाजसेवी और दीनी लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत तिलावत-ए-क़ुरआन से हुई, जिसके बाद बच्चों की हौसला-अफज़ाई की गई। कार्यक्रम में बिहार से पधारे आलिम-ए-दीन मौलाना सलाहुद्दीन मदनी साहब ने ख़ुसूसी बयान में क़ुरआन-ए-पाक की अहमियत पर रोशनी डालते हुए कहा कि क़ुरआन इंसान को सही और सच्ची राह दिखाने वाली मुकम्मल किताब है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी नशा, जुआ, गाली-गलौज और अन्य बुराइयों में फंसकर अपना भविष्य खराब कर रही है, जबकि जरूरत इस बात की है कि नौजवान हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के बताए रास्ते पर चलें और उनकी सादगी, ईमानदारी और अख़लाक़ को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि इस्लाम में इबादत केवल नमाज़ और रोज़े तक सीमित नहीं है, बल्कि ग़रीबों की मदद करना, पड़ोसियों का ख़याल रखना, बुज़ुर्गों का सम्मान करना और समाज में अच्छाई फैलाना भी इबादत का ही हिस्सा है। वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि केवल जलसों में बैठकर बातें सुनना काफी नहीं, बल्कि उस शिक्षा को अपने जीवन में उतारना ही असली कामयाबी है। कार्यक्रम के अंत में देश में अमन-शांति, भाईचारे और खुशहाली के लिए दुआ-ए-ख़ैर की गई। आयोजन की सरपरस्ती अब्दुल क़य्यूम भाई और डॉ. मुकीम साहब ने की, जबकि आयोजनकर्ता नसीर अहमद एवं ज़िला निगरान नासिर अहमद की मौजूदगी ने कार्यक्रम को मजबूती प्रदान की। बच्चों के उस्ताद कारी वसीम अकरम साहब की विशेष सराहना की गई, जिनकी मेहनत से बच्चों ने हिफ़्ज़ और नाज़रा मुकम्मल किया। हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन मुकम्मल करने वालों में हाफ़िज़ आशियान पुत्र अकील अहमद (वारसी नगर), मोहसिन पुत्र ननकू शेख (वारसी नगर), आक़िब पुत्र अतीक अहमद (मुग़लाही), हुज़ैफ़ा पुत्र वहीद खान (मुग़लाही) और वसीम पुत्र अब्दुल हसन (वारसी नगर) शामिल रहे। इसके अलावा ग्यारह बच्चों को नाज़रा क़ुरआन पूरा करने पर प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। यह कार्यक्रम समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश बनकर सामने आया कि यदि नई पीढ़ी को सही दिशा और दीनी तालीम दी जाए तो वह बुराइयों से दूर रहकर एक सभ्य, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बन सकती है।







