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नवागत एसपी अपर्णा रजत कौशिक जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरेंगी, समय बतायेगा ?

सोमेन वर्मा की तरह वे भी ‘ठाय……ठाय’ में विश्वास रखेगीं या अपराध नियंत्रण में कोई अन्य अपराध सूत्र लागू करेगीं ?

MIRZAPUR NEWS: (अमरेश चन्द्र पाण्डेय)  नवागत पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक से जनपद की जनता ने ढेरों उम्मीदे पाल रखी है किन्तु जनता के विश्वास पर वे कितना खरा उतरेगी, इसे तो समय ही बता पायेगा। जनता अटकलें लगा रही है कि अपर्णा रजत कौशिक की कार्यशैली क्या होगी। अपराध व अपराधियों के प्रति उनका नजरिया क्या होगा। सोमेन वर्मा की तरह वे भी ‘ठाय……ठाय’ में विश्वास रखेगीं या अपराध नियंत्रण में वे कोई अन्य अपराध सूत्र लागू करेगीं। उनकी ईमानदारी किस स्तर की होगी ? थानों पर निःशुल्क तेजतर्रार, कर्तव्यपरायण व ईमानदार थानाध्यक्षों को थाने की कमान सौंपेगी या खुले-आम थानों को नीलाम करेगी। कुछ इसी तरह की चर्चा जनपद के गांव-गिरांव, चट्टी-चौराहों, पर जनता आपसी बातचीत के दौरान अपने विचार व्यक्त कर रही है। आपसी गुफ्तगू के दौरान जनता अपने विचारों में एक बात और जोड़ रही है कि जब वे अठारह लाख के पैकेज को ठोकर मारकर सिविल सेवा में आई हैं तो इन्हे ईमानदार होना ही चाहिये। अपर्णा रजत कौशिक उत्तर प्रदेश के रामपुर में पिता रणवीर सिंह गौतम सब रजिस्ट्रार व माता प्रीती गौतम की कोख से सन्  1991 में जन्म लिया। दुर्भाग्य से उनके जन्म से पहले ही पिता का साया उठ गया। वे पिता का आत्मीक प्यार दुलार भी न पा सकीं। माता प्रीतीगौतम ने एक साथ माता व पिता की भूमिका निभाई और उनका संस्कार युक्त पालन पोषण किया। माता ने अपर्णा को कभी पिता की कमी नहीं महसूस होने दी। यहीं कारण है कि अपनी सफलता का सारा श्रेय अपनी पूज्यनीया मां को देती हैं।
अपर्णा रजत कौशिक 2015 की बैच की आईपीएस हैं। अमेठी से मिर्जापुर आने के पूर्व वे औरेया कासगंज की कमान संभाल चुकी है। गाजियाबाद में सहायक पुलिस अधीक्षक व शाहजहांपुर में एस.पी. आर. ए. के पद पर तैनात रहीं। यूपी की राजधानी लखनऊ में डी.सी.पी. रहते हुए माफिया और बद‌माशों की रीढ़ तोड़ी जिससे अपर्णा रजत की तेज तर्रार अधिकारी के रूप में एक अलग पहचान बनी।सहेलियों की बातें सुन आईपीएस बनी और बिजनेस एनालिसेस का 18 लाख के पैकेज पर ठोकर मार, बेटियों की सुरक्षा की पूरी गारंटी देने के लिये खाकी वर्दी तक का सफर, पूरा किया। फिजूलखर्ची से सख्त नफरत करने वाली अपर्णा ने अपनी शादी धूम‌धाम से करने के बजाय बिना शोरगुल के सामान्य तरीके से की और शादी में खर्च होने वाले फिजूल खर्च को बचाकर उस पैसे को महिला समूहों को ससक्त बनाने में लगा दिया। अपर्णा की मां पहली महिला उच्च शिक्षा निदेशक रहीं। अपर्णा बस से स्कूल जाती थी। सहेलियां पैदल स्कूल जाती थी वे अपर्णा से अपनी बातें शेयर करते बताती थी कैसे शोहदे व मनचले उन्हें छेड़ते हैं। सहेलियों की बातें उनकी प्रेरणा बनी और उसी वक्त उन्होंने ठान लिया था कि बेटियों की सुरक्षा के लिये वे खाकी वर्दी अवश्य धारण करेगी। जिस दिन अपर्णा रजत कौशिक की पहली प्रतिक्रिया सामने आएगी कि उनकी पहली प्राथमिकता क्या होगी? उसी दिन जनता की बीच चल रही गुफ्तगू पर विराम लग जाएगा।