Home उत्तर प्रदेश धारूपुर गांव में जर्जर विद्युत पोल से हादसे का अंदेशा

धारूपुर गांव में जर्जर विद्युत पोल से हादसे का अंदेशा

धारूपुर में झाड़ियों से घिरे जर्जर विद्युत पोल व मकान के ऊपर से निकली जर्जर विद्युत तार

KAUSHAMBI NEWS:  विद्युत उपकेंद्र कछुआ क्षेत्र के धारूपुर गांव जहां लगभग पांच सौ की आबादी है, धारूपुर गांव में बिजली लाइन के मापदंडों की पड़ताल की, तो हकीकत भयावह नजर आई। धारूपुर गांव में सरवन सोनकर के बगल में खड़ा विद्युत पोल लगभग दो साल से पूरी तरह जर्जर हो चुका है वही सरवन के मकान के ऊपर से 11 हजार की लाइन की जर्जर विद्युत तार निकली है। बगल में खड़े विद्युत पोल पूरी तरह से झाड़ियों ने घेर लिया है। सरवन सोनकर के मकान में छज्जे से बिजली का खंभा निकला हुआ है। वहीं इन्हीं खंभो में से बिजली के तार निकले हुए हैं। यह एक जगह की स्थिति नहीं, बल्कि गांव के कई मोहल्लों में बिजली के खंभे मकानों के सटे निकले हैं और इन्हीं खंभो में से बिजली विभाग द्वारा मोहल्लों व गलियों में बिजली सप्लाई की जा रही है।
क्या कहते है ग्रामीण
धारूपुर गांव निवासी सरवन सोनकर का कहना है कि उसके घर के ऊपर से 11 हजार की विद्युत तार निकली है कई बार विभाग से शिकायत करने पर उसके घर में नोटिस चस्पा कर कर दिया गया है, सरवन सोनकर का यह भी आरोप है कि मकान में खड़े लगभग दो साल से जर्जर विद्युत पोल को हटाने के लिए पांच हजार रुपए की मांग की जा रही है। गोविंद सोनकर का कहना है कि जर्जर विद्युत पोल से हमेशा मोहल्ले के लोगों के लिए खतरा बना रहता है साथ ही उसमें लगी जर्जर विद्युत तार कई बार टूट कर गिर चुका है, हीरालाल का कहना है कि जर्जर विद्युत पोल व तार हादसे की दावत दे रहा है, विद्युत विभाग की अनदेखी के चलते कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
संदीप सोनकर का कहना है कि गांव में लगे विद्युत पोल पूरी तरह से झाड़ियों से घिर गया है साथ ही पेड़ो की डाल से घिरे पोल से हादसे की आशंका है। धर्मेंद्र सोनकर का कहना है कि विद्युत विभाग से कई बार शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई उल्टे विभाग के कर्मचारी द्वारा धमकी दी जाती है। शिवम का कहना है कि जर्जर विद्युत तार से स्पार्किंगों से हमेशा तार टूटने या करंट फैलने का खतरा बना रहता है। इतना ही नही गलियों और रास्तों पर बिजली लाइन भी मकानों की दीवारों से सटकर निकली हुई है। लेकिन न तो इन पर बिजली विभाग का कोई ध्यान है और न ही जिम्मेदार जनप्रतिनिधि कोई गंभीरता दिखाते हैं।