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अमौसा का मेला: चेहरों पर संतुष्टि का भाव, पंगत में प्रसाद पाया फिर दान कर घर चले; स्नान करने वालों की रही भीड़

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माघ मेला क्षेत्र में वीआईपी घाट के पास वेणी दान करते महाराष्ट्र के श्रद्धालु

magh mela news : मेले में सोमवार को वापसी मार्गों और पीपा पुलों पर सिर पर गठरी, हाथों में झोला लिए लोगों के साथ गोद में बच्चों को लेकर महिलाएं और बुजुर्गों का हाथ पकड़े श्रद्धालु ही दिख रहे थे। सभी मौनी अमावस्या पर पुण्य की डुबकी लगाकर चेहरे पर संतुष्टि का भाव लिए अमौसा का मेला (माघ मेले) से वापसी करते दिखे। श्रद्धालुओं ने मौनी अमावस्या के बाद दूसरे दिन भी सुबह गंगा और त्रिवेणी संगम स्नान कर बड़े हनुमान मंदिर में दर्शन-पूजन किया। घाटों पर स्नानार्थियों की भीड़ रही। श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाने के बाद घाटों पर पुरोहितों और गुरु के शिविरों में वस्त्र-अन्न के साथ गोदान भी किया।

मेले में विभिन्न भंडारों में पंगत में बैठकर लोगों ने प्रसाद भी पाया। कुछ लोगों ने राम तो किसी ने भागवत कथा सुनकर मेला भी घूमा। प्रमुख संतों के शिविरों के भीतर भी गए। खाक चौक के साथ परेड की तरफ श्रद्धालुओं का दबाव ज्यादा रहा।
श्रद्धालु बोले-धन्य हो गया, अच्छा स्नान किया
रीवा से गांव वालों के साथ आई रमइया देवी बोलीं कि डुबकी लगावा पर चलै बहुत परा जानिं, हम प्रसाद लई लिहिंन अउर… पिपिया मा गंगा जल, इहिका अम्मा का पिआइब। कमोबेश मेले से लौटने वाले लगभग सभी श्रद्धालुओं का कहना था कि धन्य हो गए, अच्छा स्नान किया। लगभग हर श्रद्धालु अपने साथ गंगा जल जरूर ले गया।

बिंदी-सिंदूर और धागा-माला भी ले गए

त्रिवेणी रोड पर परेड के पास बिंदी-सिंदूर, धागा और माला वालों से इन वस्तुओं को प्रसाद के रूप में खरीदने वाले कम नहीं थे। कानपुर में यशोदा नगर में रहने वाले श्यामू, पत्नी पिंकी और दो छोटी-छोटी बेटियों ने कहा, पहली बार आ पाए हैं। बताया कि रिश्तेदार के यहां एक दिन पहले आए थे अब कोई ट्रेन पकड़ेंगे। यहां से प्रसाद के लिए गंगा जल और सिंदूर ले जा रहे हैं।
पीपा पुलों और वापसी मार्ग पर रही भीड़
मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लौटने लगी तो स्टेशन और बस अड्डों तक जाने वाले रास्तों और मेले में पीपा पुलों पर दोपहर बाद तक जाम की स्थिति रही। मुख्य वापसी मार्ग पर लोग फंसे रहे, बाद में हालात कुछ सामान्य हुए। दारागंज, जीटी जवाहर, नागवासुकि, अलोपीबाग, बैरहना और कीडगंज में मिंटो पार्क के पास ई-रिक्शा और ट्रॉली पर बैठने की होड़ लगी रही। तिपहिया वाहनों और ई-रिक्शा की वजह से श्रद्धालुओं के साथ आम लोगों को भी दिक्कत हुई।