LUCKNOW NEWS: उत्तर प्रदेश के विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में 2025 – 26 के लिए अनुपूरक बजट वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस बजट में औद्योगिक विकास, स्वास्थ्य, महिला कल्याण से संबंधित विकास के लिए बजट की व्यवस्था की गई है, लेकिन कर्मचारियों को इस बजट से बहुत निराशा हुई है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मानदेय निर्धारित किए जाने एवं उनकी सेवा सुरक्षा को लेकर लगातार संघर्ष कर रही है। उन्होंने कहा कि संयुक्त परिषद के संघर्ष से सरकार ने आउटसोर्स सेवा निगम का गठन तो कर दिया है, लेकिन अभी तक आउटसोर्स कर्मियों को न्यूनतम मानदेय का लाभ नहीं मिल रहा है। इस बजट से उम्मीद थी कि आउटसोर्स कर्मियों के लिए न्यूनतम मानदेय देने के संबंध में बजट में प्रावधान किया जाएगा परंतु बजट से निराशा हुई है। प्रदेश में लगभग 2500 ऐसे संविदा कर्मी कार्यरत हैं जिनका चयन विज्ञप्ति निकाल कर चयन समिति के माध्यम से सृजित पदों के सापेक्ष किया गया है तथा उनको पद संरक्षण का लाभ दिया गया है।सरकार उनके पद के मूल वेतन मैट्रिक्स एवं राज्य कर्मचारियों को दिए जाने वाले महंगाई भत्ते का लाभ भी दे रही है। बजट से आशा थी कि ऐसे संविदा कर्मियों के नियमितीकरण के बारे में सरकार प्रस्ताव लाएगी, लेकिन निराशा ही हाथ लगी है। उन्होंने कहा कि राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने प्रदेश के मुख्यमंत्री के ईमेल आईडी पर एक पत्र प्रेषित करते हुए अनुपूरक बजट पर कर्मचारियों के लिए अपनी चिंता जाहिर किया है तथा कर्मचारियों से संबंधित मांगों पर विचार करने का अनुरोध किया है।
ज्ञातव्य है कि 2001 के बाद अभी तक संविदा, वर्क चार्ज एवं दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित करने के लिए कोई निर्णय सरकार ने नहीं लिया है । यह कर्मचारियों की जुड़ा हुआ एक महत्वपूर्ण मुद्दा है जिससे आने वाला 2027 का आम चुनाव भी प्रभावित हो सकता है।







