जिस दिन दिखाया लूट, उस दिन आरोपी था जेल में
SAMBHAL NEWS: संभल में फर्जी मुठभेड़ के मामले में कोर्ट ने तत्कालीन सीओ समेत 13 पुलिसकर्मियों पर FIR का आदेश दिया है। इनमें घटना के समय तैनात रहे सीओ के अलावा 2 इंस्पेक्टर, 4 दरोगा और सिपाही शामिल हैं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने कहा- रिकॉर्ड से यह तथ्य सामने आया कि जिस दिन लूट की घटना दर्शाई गई, उस दिन आरोपी अन्य मुकदमे में जिला कारागार बदायूं में बंद था।
प्रथम दृष्टया यह संकेत मिलता है कि कुछ पुलिसकर्मियों ने षड्यंत्र, गलत तरीके से जांच, दस्तावेजों की जालसाजी और पद का दुरुपयोग किया है। कोर्ट ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के पहले के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा- लोकसेवकों को गैरकानूनी काम के लिए संरक्षण प्राप्त नहीं है। ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज कर जांच कराना आवश्यक है। कोर्ट ने थाना बहजोई के थानाध्यक्ष को निर्देश दिए कि तत्काल मुकदमा दर्ज कर 3 दिनों के अंदर कोर्ट में रिपोर्ट सौंपें।
दरअसल, संभल की बहजोई थाना पुलिस पर मुठभेड़ दिखाकर दो युवकों धीरेंद्र और अवमेश को एक लाख रुपए की लूट और 19 मोटरसाइकिल चोरी के मामलों में फंसाने का आरोप है। इनमें एक आरोपी घटना के समय बदायूं जेल में बंद था। मामला 25 अप्रैल 2022 का है। अर्जुनपुर जूना गांव निवासी दुर्वेश पुत्र वीरपाल बहजोई से दूध का भुगतान लेकर अपने गांव लौट रहे थे। दोपहर करीब 1:10 बजे मोटरसाइकिल सवार दो अज्ञात व्यक्तियों ने उनसे एक लाख रुपए लूट लिए। उसी दिन दोपहर 2:40 बजे बहजोई थाने में अज्ञात के खिलाफ धारा 392 आईपीसी के तहत मुकदमा संख्या 185/2022 दर्ज किया गया। इस मुकदमे की विवेचना तत्कालीन एसएचओ पंकज लवानिया ने उपनिरीक्षक प्रबोध कुमार को सौंपी थी, जिसे बाद में तत्कालीन निरीक्षक अपराध राहुल चौहान को स्थानांतरित कर दिया गया। आरोप है कि विवेचना के दौरान तत्कालीन सीओ बहजोई गोपाल सिंह, तत्कालीन एसएचओ पंकज लवानिया, तत्कालीन उपनिरीक्षक प्रबोध कुमार और तत्कालीन निरीक्षक अपराध राहुल चौहान ने अन्य पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर षड्यंत्र के तहत धीरेंद्र पुत्र कुंवरपाल और अवमेश पुत्र ऋषिपाल को झूठे मामले में फंसा दिया। आरोप है कि 7 जुलाई 2022 को पुलिस ने एक फर्जी मुठभेड़ दिखाकर धीरेंद्र और अवमेश को गिरफ्तार किया। इसके बाद उन्हें 19 मोटरसाइकिल लूट की बरामदगी से जोड़ते हुए 25 अप्रैल 2022 की लूट की घटना में शामिल बताया गया और चालान कर जेल भेज दिया गया। रिकॉर्ड के अनुसार, धीरेंद्र 11 अप्रैल 2022 से 12 मई 2022 तक जिला कारागार बदायूं में निरुद्ध था। उसकी जमानत 26 अप्रैल 2022 को मंजूर हुई थी और वह 12 मई 2022 को जेल से रिहा हुआ। ऐसे में, जिस दिन लूट की घटना बताई गई, उस दिन धीरेंद्र का उसमें शामिल होना संभव नहीं था। इसके बावजूद 12 जुलाई 2022 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया।







