रेउसा थाना उपनिरीक्षक सुरेंद्र सिंह पर लगे रिश्वत लेने व उच्च अधिकारियों को महिला पत्रकार के बारे में भ्रमित करने के आरोप
SITAPUR NEWS: थाना रेउसा की पीड़ित पत्रकार चेतना अवस्थी 8 दिसंबर को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से लखनऊ मिलने के बाद और अपनी समस्या को बताने के बाद तत्काल कार्रवाई का आदेश देते हुए सीओ बिसवा के वहां पीड़ित महिला पत्रकार को 10 दिसम्बर को बयान दर्ज करने के लिए बुलाया गया था।जहां पीड़ित महिला पत्रकार तो पहुंची व अपने बयान दर्ज करवाए परंतु रेउसा थाना उप निरीक्षक सुरेंद्र सिंह बुलाने के बाद भी हाजिर नहीं हुए। महिला ने सुरेंद्र सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सुरेंद्र सिंह पैसे के बिना कोई कार्रवाई नहीं करते और सुलह का दबाव बनाए रखते हैं शिकायत करने पर और उनकी बात ना मानने पर उच्च अधिकारियों को पीड़ित व्यक्ति के खिलाफ भड़कते हैं वह गलत जानकारी देकर भ्रमित करते हैं। सूत्रों के हवाले से यह भी ज्ञात हुआ है कि सुरेंद्र सिंह की छवि महिलाओं से दुर्व्यवहार करने के लिए भी जानी जाती है जो महिलाएं आए दिन थाने में फरियाद लेकर अपनी समस्याएं लेकर पहुंचती है सुरेंद्र सिंह महिलाओं का अपमान करते हैं साथी उनके साथ गाली गलौज व अभद्रता करते हैं। कहते हैं कि दोबारा थाने में नजर आई तो तुम्हारे दांत तोड़ दूंगा तुम्हारे जबड़े तोड़ दूंगा। जब एक पीड़ित महिला जो खुद एक पत्रकार है तथा समाज सेविका के रूप में भी कई वर्षों से कार्य कर रही है व कई संगठनों से भी जुड़ी है साथ ही सैकड़ो महिलाओं की मदद भी करी है उसे ही अपने न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ा लिखित तहरीर देने के बाद भी जब उसे पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उसे योगी जी से मिलने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं मिला तो महिला पत्रकार अपनी समस्या लेकर योगी जी से मिली जहां योगी जी के द्वारा तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए गए परंतु उसके बाद भी अपनी दबंगई और रसूख तथा अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हुए रेउसा थाना उप निरीक्षक सुरेंद्र सिंह सी ओ सिटी बिसवा के ऑफिस में बुलाने के बाद भी नहीं पहुंचे। इस बात से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि सुरेंद्र सिंह अपने आला अधिकारियों को भी कुछ नहीं समझते। योगी जी का आदेश भी उनके लिए कोई मायने नहीं रखता जब वह इस तरीके की लापरवाही अपने अधिकारियों के साथ कर सकते हैं तो आम जनता या महिलाओं के साथ उनका व्यवहार किस तरीके का होगा बखूबी इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है महिला का यह भी कहना है कि लिखित तहरीर देने पर सुरेंद्र सिंह टालमटोल करते रहते हैं वह कोई कार्रवाई नहीं करते जब तक उनको पैसे की भेंट न दी जाए। आईजीआरएस के माध्यम से शिकायत करने पर वह समस्या का निस्तारण किए बिना ही जांच किए बिना ही कोई कार्रवाई किए बिना ही पीड़िता से आईजीआरएस की जांच के बाद लगाए जाने वाली फोटो और फोन पर आने वाली ओटीपी भी वह पहले ही ले लेते हैं जिससे अपना रास्ता वह साफ कर सके और पीड़िता को दर-दर भटकने के लिए छोड़ दें। अपने पद व कानून का गलत इस्तेमाल किस प्रकार करना चाहिए यह रेउसा थाना उपनिरीक्षक सुरेंद्र सिंह बखूबी इतने सालों से समझ चुके हैं वह लगातार अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं यदि इसी प्रकार चलता रहा तो पीड़ित महिलाएं किस तरह थाने में न्याय मांगने के लिए जा पाएंगी।सुरेंद्र सिंह की डर और दहशत इस तरह दिन पर दिन कायम होती जा रही है की महिला पत्रकार को योगी जी के वहां जाना पड़ा। जहां तक शायद सब पहुंचने की नहीं सोच सकते अब देखते हैं कि अपने पद का इस्तेमाल करके सुरेंद्र सिंह अपने पद का गलत इस्तेमाल करके बच जाएगा या आला अधिकारी इस विषय पर संज्ञान लेकर उपनिरीक्षक सुरेंद्र सिंह पर कोई ठोस कार्रवाई करेंगे जिससे पीड़ित महिलाओं को या किसी भी पीड़ित व्यक्ति को न्याय मिल सके और सरकार की तरफ से तो ऐसा कोई कानून नहीं है की प्रार्थना पत्र देने पर या थाने में शिकायत करने पर साथ में रिश्वत या घूस देनी अनिवार्य है। यदि कानून में ऐसा कोई नियम नहीं है कि पीड़ित व्यक्ति को पैसे देने पर ही कार्रवाई होगी तो रेउसा थाना उपनिरीक्षक सुरेंद्र सिंह क्या अपने अलग कायदे और नियमों को बनाकर कानून चलाएंगे? और कानून के नाम पर कलंक बनेंगे?सरकार के बनाए नियमों को जो महिलाओं के अधिकारों के लिए बनाया गया है और महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाया गया है जैसे महिला सशक्तिकरण, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, मिशन शक्ति, नारी सुरक्षा इन सबको ताक पर रखकर क्या सुरेंद्र सिंह पैरों तले रौंदता रहेगा?







