VARANASI NEWS: स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज़ (एस.एम.एस.) वाराणसी के कंप्यूटर साइंस विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ए.आई. : नवाचार, वैश्विक रुझान और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी की खोज का समापन सत्र सत्र आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि प्रो. ए. के. त्रिपाठी, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग, आई.आई.टी. (बीएचयू) ने एआई के तकनीकी विकास, वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत रूप से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब केवल अनुसंधान प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है। स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, उद्योग, ऊर्जा प्रबंधन और साइबर सुरक्षा हर क्षेत्र में यह केंद्रीय भूमिका निभा रही है। उन्होंने एआई के विकास को तीन मुख्य चरणों में विभाजित करते हुए कहा कि पहला चरण—डेटा संचालित मॉडल, दूसरा—डीप लर्निंग आधारित संज्ञानात्मक प्रणालियाँ और तीसरा—एजेंटिक एआई, जो स्वयं लक्ष्य निर्धारित कर कार्य कर सकता है। प्रो. त्रिपाठी ने इस क्षेत्र में भारत की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत के पास विश्व की सबसे तेज़ी से विकसित होती युवा तकनीकी शक्ति है। यदि हम एआई स्किलिंग, एथिक्स और इनोवेशन को मजबूत करें, तो भारत ‘एआई-केंद्रित राष्ट्र’ के रूप में वैश्विक नेतृत्व प्राप्त कर सकता है। समापन सत्र में निदेशक प्रो. पी. एन. झा ने कहा कि यह दो दिवसीय सम्मेलन विद्यार्थियों, शोधार्थियों और विशेषज्ञों के लिए एक ऐसा शैक्षणिक मंच रहा, जिसने ए.आई. के वैश्विक परिदृश्य, नैतिकता, स्थिरता और नवाचार के अनेक आयामों को स्पष्ट किया। नेक्स्ट जेन ए.आई. मानव विकास के नए प्रतिमान गढ़ रहा है, और हमें इसके संभावित सामाजिक प्रभावों को भी समझना होगा। उन्होंने प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की और शोध एवं नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। समापन सत्र में प्रो. आनंद प्रकाश दुबे ने दो दिवसीय सम्मेलन की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि सम्मेलन के दौरान 2 प्लेनरी सेशन, 2 तकनीकी सत्र, 2 ऑनलाइन सत्र आयोजित किए गए, जिनमें देशभर के प्रतिभागियों ने शोधपत्र, केस स्टडी और तकनीकी प्रस्तुतियाँ दीं। उन्होंने बताया कि एआई के विभिन्न उप-विषयों—जैसे एजेंटिक एआई, जनरेटिव एआई, साइबर सिक्योरिटी, एआई एथिक्स, इंडस्ट्री 4.0 और भविष्य की तकनीकी प्रवृत्तियों पर व्यापक विमर्श हुआ। कॉन्फ्रेंस के समापन सत्र में सबसे अच्छे शोध को अवॉर्ड भी प्रदान किया गया। निर्णायक मंडल द्वारा चयनित शोधपत्रों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। समापन सत्र का संचालन डॉ. सोफिया खान ने किया व प्रो. कमलशील मिश्र ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर संस्थान के अधिशासी सचिव डॉ. एम. पी. सिंह, निदेशक प्रो. पी. एन. झा, कुलसचिव संजय गुप्ता, प्रो. शंभूशरण श्रीवास्तव, प्रो. रामगोपाल गुप्ता, सुशील कुमार सहित विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य, शोधार्थी और छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।







