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अखिल भारतवर्षीय गोंड़ महासभा ने मनाई वीर बिरसा मुंडा की 150 वीं जयंती

MIRZAPUR NEWS: अखिल भारतवर्षीय गोंड़ महासभा के तत्वाधान में वीर बिरसा मुंडा की 150 वीं जयंती मनाई गई। दोमुहिया स्वतंत्रता संग्राम सेनानी झूरी बिन्द के आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर और प्रकृति पूजा के उपरान्त जनजाति गौरव यात्रा वाहन से निकाली गई। वाहन पर आदमकद चित्र बिरसा मुण्डा का लगा था।जगह-जगह अखिल भारतीय गोंड़ महासभा के लोगो ने बिरसा मुण्डा के चित्र पर माल्यार्पण भी किया और लोकनृत्य कर बिरसा मुण्डा का गाथा भी गाया गया। यात्रा का नेतृत्व प्रदेश महासचिव रामप्यारे गोंड़ ने किया। यात्रा दोमुहिया से शुरू होकर घोड़े सहित होते हुये रमईपट्टी से सपा कार्यालय लोहिया ट्रस्ट पहुंची। इस मौके पर सपा जिलाध्यक्ष देवी प्रसाद चौधरी ने वीर बिरसा मंुडा के चित्र पर माल्यार्पण किया और कहा कि वीर बिरसा मुण्डा के वीरता, साहस और शौर्य को आदिवासी समाज के लोग बलिदान दिवस के रूप में मनाते रहे हैं। कलेक्टेट में इस अवसर पर धर्म और अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया गया। इस मौके पर प्रदेश महासचिव एवं जिलाध्यक्ष जनजाति प्रकोष्ठ रामप्यारे गोंड़ ने कहा कि 15 नवंबर को धरती आबा क्रांतिकारी वीर बिरसा मुंडा की जयंती मनाई जाती है। इस मौके पर आठ सूत्रीय मांग पत्र अपर उपजिलाधिकारी संजीव यादव को सौपा गया। जिसमे मांग की गई कि गोंड़ जाति के लोगो को शासनादेश के अनुरूप जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाय। जनपद के किसी चौराहे पर आबा बिरसा मुण्डा की प्रतिमा लगाई जाय। साथ ही पेनवासी मोती रावण कंकाली को भारतरत्न देकर सम्मानित किया जाय। इसी क्रम में भारत सरकार केन्द्र की भांति उत्तरप्रदेश में भी राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग का गठन किया जाय तथा उसके अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सभी सदस्य अनुसूचित जनजाति के होने चाहिये। प्रदेश की सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जनजाति सीट पर आरक्षित सीट को हर हाल में अनुसूचित जनजाति के लोगो से ही भरा जाय। कहा गया कि देश में लगातार आदिवासियों के ऊपर हो रहे अत्याचार/अन्याय को तत्काल रोक लगाया जाय। प्रदेश में निवासरत कोल व मुसहर जाति को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया जाय। इस मौके पर सत्यप्रकाश यादव, डॉ0 शक्ति श्रीवास्तव, शैलेष पटेल, राममिलन यादव, झल्लू यादव, तिरूमाल राम प्यारे गोंड़, पारस नाथ गोंड़, इन्द्रजीत गोंड़, रामसागर धु्रवे, महेश गोंड़, जटा शंकर गोंड़, महेन्द्र कुमार गोंड़, विष्णुचरन गोंड़, कमलेश गोंड़, हरीलाल गोंड़, चमन लाल गोंड़, जोगेन्द्र गोंड़, सूरज गोंड़, दिनेश गोंड़, राधेश्याम गोंड़, रविशंकर गोंड़ आदि मौजूद रहे।