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सीईपीसी अध्यक्ष कुलदीप राज वट्टल ने कालीन उद्योग को लेकर पीएम मोदी से मुलाकात की

BHADOHI NEWS: कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के अध्यक्ष कुलदीप राज वट्टल ने 3 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री आवास में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। इस बैठक में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और केंद्रीय वित्त मंत्री  निर्मला सीतारमण भी उपस्थित थीं। भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग के लिए यह अत्यंत गर्व की बात थी, कि सी.ई.पी.सी. उन कुछ ई.पी.सी. में से एक था जिन्हें बैठक में आमंत्रित किया गया था, और विशेष रूप से, उसे  प्रधानमंत्री के समक्ष बोलने का पहला अवसर दिया गया – जो भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और निर्यात में इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण योगदान देता है। बातचीत के दौरान, वट्टल ने हस्तनिर्मित कालीन क्षेत्र पर एक संक्षिप्त जानकारी प्रस्तुत की, जो भदोही, मीरजापुर, वाराणसी, जयपुर, पानीपत, आगरा और श्रीनगर जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में 25 लाख से अधिक कारीगरों, जिनमें अधिकतर महिलाएं हैं, जिनको रोजगार देता है। उन्होंने उद्योग को मजबूत करने के लिए प्रमुख नीतिगत सिफारिशों की रूपरेखा प्रस्तुत किया, जिनमें अति विशेष दर्जा प्रदान करना, फोकस उत्पाद योजना लाभ, ब्याज अनुदान का विस्तार, “हैंडमेड इन इंडिया – क्राफ्टिंग स्टोरीज” अभियान के माध्यम से वैश्विक ब्रांडिंग, निर्यात प्रोत्साहन सहायता, धारा 43बी(H) के तहत राहत और एम.एस.एम.ई. निर्यातकों के लिए ऋण लागत को कम करने के लिए ईसीजीसी प्रीमियम बोझ में कमी शामिल है।
सीईपीसी अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि यह कालीन उद्योग क्षेत्र, जो प्रतिवर्ष लगभग 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निर्यात में योगदान देता है और वैश्विक हस्तनिर्मित कालीन बाजार का 40% से अधिक हिस्सेदारी रखता है, भारत के अगले राष्ट्रीय परिवर्तन – “हस्तशिल्प क्रांति” का नेतृत्व करने के लिए तैयार है – यह पहल ग्रामीण भारत को सशक्त बनाना और प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल के दृष्टिकोण के साथ पूर्णतः अनुरूप है।
वट्टल ने प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व और हस्तनिर्मित कालीन क्षेत्र की आकांक्षाओं पर व्यक्तिगत ध्यान देने के लिए उनके प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया और आश्वासन दिया कि उद्योग मजबूत  और हस्तनिर्मित उत्कृष्टता में भारत के वैश्विक नेतृत्व को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री ने इनकी बातों को गौर से सुना और उन्होंने जल्द ही कारपेट इंडस्ट्रीज़ को सहायता करने का आश्वासन दिया ।