AURAIYA NEWS: तीन जिलों का पवन तीर्थ स्थल पंचनद संगम पर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाले दस दिवसीय मेला एवं स्नान पर्व की तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं। प्रशासन ने सुरक्षा, स्वच्छता और श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर व्यापक इंतजाम शुरू कर दिए हैं। लाखों की भीड़ की संभावना को देखते हुए औरैया, इटावा व जालौन जिलों की पुलिस फोर्स संयुक्त रूप से तैनात की जाएगी। पर्व के दौरान यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए वाहनों के मार्ग डायवर्ट रहेंगे। पंचनद संगम को धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक विरासत का अद्भुत संगम स्थल माना जाता है। यही वह पवित्र धरा है जहां यमुना, चंबल, सिंध, क्वारी और पहूज नदियां एक साथ मिलती हैं। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहां स्नान करने से समस्त पापों का नाश होता है और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इतिहास के अनुसार, यह क्षेत्र कभी सेंगर क्षत्रियों का समृद्ध राज्य रहा है। सोलहवीं शताब्दी में पंचनद आश्रम में साधना कर रहे वन संप्रदाय के सिद्ध संत श्री मुकुंदवन (बाबासाहब) महाराज से गोस्वामी तुलसीदास की भेंट यहीं हुई थी, जिसने इस पावन भूमि की आध्यात्मिक गरिमा को और बढ़ा दिया। कभी दस्यु आतंक के लिए कुख्यात रहा यह इलाका अब पर्यटन और श्रद्धा का केंद्र बन चुका है। प्रशासन और स्थानीय लोगों के प्रयासों से पंचनद का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक माहौल में अब दूर-दूर से श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। बाबासाहब मंदिर परिसर में अधिकारियों की बैठक में विभागों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। स्नान घाटों की सफाई, नदी के गहरे हिस्सों में लोहे की जालियां, प्रकाश व्यवस्था, महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम, सीसीटीवी कैमरे, स्वास्थ्य शिविर, पेयजल, अग्निशमन व चल शौचालयों की व्यवस्था की जा रही है। तीनों जिलों की पुलिस संयुक्त रूप से पर्व के दौरान कानून व्यवस्था और यातायात को संभालेगी। प्रशासन का लक्ष्य इस वर्ष पंचनद मेले को सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित रूप में संपन्न कराना है ताकि श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के पुण्य स्नान का लाभ उठा सकें।







