JHANSI NEWS: खुद संभलकर चलो…क्योंकि नगर निगम की सड़कें दुर्घटना को बुलावा देने लगी हैं। जहां नई डामर की सड़कें धंसक रही हैं। वहीं सड़कों में अनगिनत गड्ढे मुसीबत खड़ी कर रहे हैं। स्ट्रीट लाइट की समस्या का समाधान अब तक नहीं हो पाया है। शहर की अधिकांश सड़कों पर अंधेरा पसरा हुआ है। ये अंधेरा रात में कभी-भी कोई बड़े हादसे का कारण बन सकता है। झाँसी स्मार्ट सिटी के तहत बनाई गई सड़कों का हाल अब बेहद खस्ता हो गया है. नगर की कई प्रमुख सड़कों पर गड्ढे और जर्जर हालत के कारण वाहन चालकों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है. इन सड़कों में से कुछ सड़कें तो ऐसी हैं जो एक ही नगर में अलग-अलग कैटेगरी में बंटी हुई हैं, जहां एक जगह चकाचक सड़क मिलती है, वहीं कुछ ही दूरी पर जर्जर सड़क मिल जाती है. नगर की जर्जर हो चुकी सड़कों पर अब बस बड़े हादसे का इंतजार है, क्योंकि नगर निगम और जिला प्रशासन कुंभकरण की नींद सोये हुए है । जनपद के कैबिनेट मंत्री से लेकर सांसद, विधायक और महापौर को भी शहर की जर्जर सड़कों के गड्ढे दिखाई नहीं देते, क्योंकि चुनाव के बाद इन्होंने कभी गली, मोहल्ले और कालोनियों में पैर ही नहीं रखा तो भला इन्हें गड्ढों के दर्द का अहसास भी कहां से होगा। इन्हें मतलब है तो केवल विकास के नाम कागजी घोड़े दौड़ाने और वाही-वाही लूटने से। शहर की हकीकत किसी से छिपी नहीं है।
स्मार्ट सिटी के नाम पर अरबों रुपये बहाने वाली सरकार नगरवासियों को चलने के लिए एक अच्छी सड़क भी न दे सकी। पाश एरिया की टूटी सड़कें अपनी दुर्दशा को बयान कर रही हैं, क्योंकि मुख्य सड़कों से जोड़ने वाली शहर में ऐसी एक भी सड़क नहीं है जिस पर वाहन बिना हिचकोले खाए गुजर सके और गड्ढों के दर्द से आमजन बच सके.







