Home आस्था अपने आश्रित मनुष्य की कष्टों से भगवान स्वयं रक्षा करते हैं

अपने आश्रित मनुष्य की कष्टों से भगवान स्वयं रक्षा करते हैं

SAHARANPUR NEWS: धोलाहेड़ी गांव मे आयोजित भागवत कथा के दुसरे दिन पंडित संजय प्रपन्नाचार्य ने कहा किमहाभारत युद्ध के उपरांत अश्वत्थामा द्वारा अभिमन्यु की पत्नी पर ब्रह्मास्त्र संधान किया गया परिणामस्वरूप गर्भस्थ जीव की मृत्यु का आभास होने पर उत्तरा ने भगवान श्रीकृष्ण से करुण पुकार की तो भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कृपा दृष्टि से मृत जीव को पुनर्जीवित कर सुदर्शन चक्र द्वारा सुरक्षा प्रदान की जन्म लेते जीव ने संसार मे गर्भ में रक्षा करने वाले ईश्वर को चारों ओर देखा तो ब्राह्मणों द्वारा परीक्षित नाम रखा गया, गर्भ में भगवान के द्वारा ही भरण पोषण और रक्षण होता होता है परंतु संसार की मोह माया में फंसकर मनुष्य भगवान की कृपा और शक्ति को भूल कर अपने आप को ही कर्ता धर्ता मान बैठता है परिणाम स्वरूप जीवन में प्राप्त सुख और आनंद के स्थान पर दुखों का भोक्ता बनकर रह जाता है,प्रपन्नाचार्य जी ने कहा मनुष्य को जीवन में सावधानीपूर्वक परमात्म प्रदत्त शक्तियों का सदुपयोग करते हुए जीवन व्यतीत करना चाहिए, राजा परीक्षित द्वारा अहंकार में संतोष का अपमान हुआ अशोक सरपंच रामनाथ सैनी प्रेमनाथ सैनी,सरवन कुमार बालेश कुमार, नाथीराम,शशि बाला,सुधा,राजेश गुप्ता आदि