JHANSI NEWS: ऐतिहासिक धरोहरों को समेटे झाँसी अब तक ग्लोबल मार्केट में अपनी पहचान नहीं बना सका। हालात यह हैं कि देश-विदेश में ख्याति पा चुके झाँसी में अब विदेशी तो छोड़ो स्थानीय श्रोताओं को भी मान-मुनव्वल के साथ बुलाना पड़ता है। यह कमजोर राजनीतिक इच्छा शक्ति का ही परिणाम है कि पर्यटन स्थल पर टूरिस्ट सर्किट तो दूर पर्यटकों के लिए खाने-पीने की उचित व्यवस्था तक नहीं है। विकास के वादों के साथ जनप्रतिनिधि आए और गए, पर पर्यटन के विकास पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। सड़कों की दुर्दशा के कारण प्रचीनकालीन धरोहरों तक पहुंचने के लिए भी कठिनाई का सामना करना पड़ाता है। पिछले कई सालों में विकास के नाम पर चर्चाओं का दौर तो गर्म रहा, लेकिन विकास कोसों दूर रहा। पर्यटन स्थलों की जर्जर सड़कें, प्रचार-प्रसार का अभाव कमजोर राजनीतिक इच्छाशक्ति को दर्शाता है। महंगे होटल, अनाधिकृत गाइड तथा ट्रेवल्स एजेंट की मनमानी रोकने वाला तक कोई नहीं है, जिस कारण शहर से पर्यटक घटे हैं।
पर्यटकों ने नगर से दूरी बनाने के प्रमुख कारण है.
1:- ऐतिहासिक धरोहरों पर सुरक्षित पहुंच मार्ग व सुविधाओं का अभाव
2:- ऐतिहासिक धरोहरों का प्रचार-प्रसार न होना, महंगा कॉमर्शियल होटल
3:- 5 स्टार होटल के नाम पर अधिक पैसा पर सुविधाएं आधी भी नहीं
4:- विदेशी पर्यटकों को लाने वाली एजेंसी संचालकों से समन्वय न होना.







