समग्र फतेहपुर विमर्श से बुंदेलखंड राष्ट्र समिति ने दिया आत्मनिर्भर फतेहपुर का संदेश
FATEHPUR NEWS: बुंदेलखंड राष्ट्र समिति द्वारा आयोजित “समग्र फतेहपुर विमर्श” कार्यशाला का सीपीएस कॉलेज सभागार में भव्य आयोजन हुआ। कार्यशाला का नेतृत्व समिति के केंद्रीय अध्यक्ष प्रवीण पांडेय बुंदेलखंडी ने किया। उन्होंने जिले के सर्वांगीण विकास के लिए एक नए अभियान का उद्घोष किया— “मेरी माटी, मेरा तीर्थ, मेरा फतेहपुर – मैं ही संवारूंगा।” यह उद्घोष केवल एक नारा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और जागरूक फतेहपुर की दिशा में सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक बन गया। कार्यशाला का उद्देश्य जिले के विकास के लिए समाज के विभिन्न वर्गों—शोध, शिक्षा, कृषि, उद्योग, पर्यावरण, युवा, महिला और सांस्कृतिक क्षेत्र—से संवाद स्थापित करना था, ताकि एक समग्र और जनसहभागिता आधारित विकास मॉडल तैयार किया जा सके। केंद्रीय अध्यक्ष प्रवीण पांडेय बुंदेलखंडी ने कहा कि फतेहपुर का भविष्य केवल सरकारी योजनाओं से तय नहीं होगा, बल्कि समाज के हर वर्ग की सहभागिता और संवाद से तय होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान किसी राजनीतिक दल का मंच नहीं है, बल्कि जन-चेतना का प्रयास है। उन्होंने कहा कि जिले के हर वर्ग से प्राप्त सुझावों और विचारों को संकलित कर एक दीर्घकालिक विकास रोडमैप तैयार किया जाएगा, जो फतेहपुर को वर्ष 2047 तक एक आदर्श, आत्मनिर्भर और आकांक्षी जनपद के रूप में स्थापित करेगा। कार्यशाला में शिक्षा, स्वास्थ्य रोजगार पलायन और पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार- विमर्श किया गया। पूर्व विधायक विक्रम सिंह ने कहा कि “समग्र फतेहपुर विमर्श” जिले के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं न केवल नीतिगत सुझाव देती हैं, बल्कि जनप्रतिनिधियों को समाज के वास्तविक मुद्दों से भी जोड़ती हैं। विधायक कृष्णा पासवान ने कहा कि कार्यशाला में रखे गए सभी सुझावों पर सरकार के माध्यम से हरसंभव प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विकास केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि संकल्पों और समन्वय से आता है। राजेंद्र साहू ने युवाओं के लिए रोजगार अवसरों पर विशेष बल दिया और कहा कि जिले की प्रतिभाओं को स्वरोजगार और कृषि आधारित उद्योगों की दिशा में प्रेरित करने की आवश्यकता है। डॉ. देवाशीष पटेल ने “समग्र फतेहपुर विमर्श” के प्रयास को ऐतिहासिक बताया और कहा कि यदि नागरिक समाज और नीति-निर्माताओं के बीच इस तरह का संवाद निरंतर जारी रहा, तो फतेहपुर विकास का नया मॉडल बन सकता है। संतोष सिंह राजू ने किसानों को अपने उद्यमों और स्थानीय उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की दिशा में ठोस पहल करने का सुझाव दिया। कार्यशाला में यह भी प्रस्ताव पारित हुआ कि जिले के विकास के लिए “संभावित मंडल गठन फतेहपुर” की प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि प्रशासनिक और शैक्षिक दृष्टि से फतेहपुर को नई पहचान मिल सके। शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेज की स्थापना, जल-पर्यावरण विश्वविद्यालय की मांग, खेल संसाधनों का विस्तार, वहीं ऊंचाहार–खागा–अतर्रा–सागर रेलवे लाइन का विस्तार जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। साथ ही खागा तहसील के महन्ना ऊसर क्षेत्र में गौ आधारित उत्पाद निर्माण फैक्ट्री स्थापित करने के प्रस्ताव को भी सराहा गया। कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख विकास पासवान, आदित्य त्रिवेदी, जिला पंचायत सदस्य ओम मिश्रा, ज्योति प्रवीण, अखिलेश मौर्या, संगठन महामंत्री यज्ञेश गुप्ता, जिला अध्यक्ष ब्रजेश सोनी, नगर अध्यक्ष प्रमोद गुप्ता, व्यापार मंडल अध्यक्ष शिवचंद्र शुक्ल, अंजू त्रिपाठी, प्रवीण त्रिवेदी, धर्मेंद्र दीक्षित, राकेश तिवारी, प्रेम शंकर मिश्रा, विजय त्रिपाठी, अनुराग मिश्रा, नास्त्रेदमस त्रिपाठी, चेतन त्रिपाठी, उत्कर्ष त्रिवेदी , धर्मेंद्र सिंह, जुगेश सिंह, ब्रजेश सिंह, रामनारायण शुक्ल, महेश पाण्डेय, राकेश द्विवेदी, उत्कर्ष जायसवाल, लिटिल गर्ग, अनुराग मिश्रा सहित जिले के अनेक सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद, छात्र और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन पर यह निष्कर्ष उभरकर आया कि फतेहपुर की असली ताकत उसकी माटी, मेहनतकश लोग और उनकी जिजीविषा है। यदि समाज अपने हिस्से की जिम्मेदारी समझे और प्रशासन संवेदनशील बने, तो फतेहपुर किसी बाहरी सहायता की प्रतीक्षा किए बिना आत्मनिर्भर विकास की मिसाल बन सकता है। “मेरी माटी, मेरा तीर्थ, मेरा फतेहपुर – मैं ही संवारूंगा” केवल एक नारा नहीं, बल्कि इस जिले के आत्मविश्वास की गूंज बन गया है।







