सरकार का जीएसटी बचत उत्सव एवं तत्काल लाभ हो रहा बेमकसद
FATEHPUR NEWS: कपड़े और किराने में जीएसटी की नई दरों का लाभ ग्राहकों को नहीं मिल रहा है। इसे लेकर शहर व कस्बों में दुकानों पर हर रोज ग्राहकों और दुकानदारों से किचकिच हो रही है। जिन दुकानदारों के पास पुराने दर वाले सामान के स्टाॅक बचे हैं उनको पुराने ही रेट पर बेच रहे हैं। जीएसटी की नई दरों को लेकर दुकानों पर ग्राहक प्रत्येक दिन पूछताछ करते हैं। जीएसटी की नई दरें लागू होने के बाद आम उपभोक्ताओं को उम्मीद थी कि रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर कपड़ों और किराना सामान तक की कीमत में राहत मिलेगी, लेकिन ग्राहक को अभी कुछ लाभ नहीं मिल रहा है। फुटकर दुकानदार अब भी पुराना स्टॉक बताकर पुरानी एमआरपी पर ही सामान बेच रहे हैं। इस वजह से उपभोक्ताओं को नए रेट का लाभ नहीं मिल रहा है। दूसरी ओर व्यापारी पुराने स्टॉक की बिक्री के बाद रिटर्न दाखिल करके सरकार से लाभ लेने की तैयारी में हैं। बाजार में जीएसटी की नई दरों को लेकर हर कोई चर्चा करता मिल जाएगा। बाजार में इसका सीधा असर दिख रहा है। बात किराना व कपड़े की दुकानों की करें तो अधिक झोल यहीं है। यहां से कोई पक्का बिल मांगता नहीं है। ऐसे में यहां सामानों को पुराने दाम पर ही बेचा जा रहा है। जीएसटी की दरों में 22 सितंबर से बदलाव लागू हुआ। इसे लेकर सत्ता पक्ष के नेता प्रत्येक दिन लोगों को समझा रहे थे कि इसका तत्काल लाभ मिलेगा। जागरूकता के दौरान लोगों को जीएसटी बचत उत्सव का अभियान चलाकर लोगों को बताया जा रहा कि रोजमर्रा के सामनों के कीमतों में त्वरित लाभ मिलेगा। हालत यह है कि सब कुछ पहले की तरह सा ही है। ऐसे में साफ है कि जीएसटी दरों में बदलाव का आम आदमी को अधिक राहत नहीं मिली है। इसी तरह से कई ग्राहकों का कहना है कि दुकानदार यह बता रहे हैं कि नया स्टॉक आने पर छूट मिलेगी, पुराने सामान को उसी रेट में बेचा जा रहा है। उधर कारोबारी भी अपना दर्द बयां कर रहे हैं। जिनके पास पुराना स्टाॅक बच गया है उसे किसी तरह से खाली करने में कारोबारी जुटे हैं। कारोबारी तर्क देते हैं कि जिस रेट में खरीदारी हुई है, उससे कम में किस तरह से बेच दिया जाए। जीएसटी में छूट का लाभ थोक विक्रेताओं को मिलेगा, फुटकर विक्रेता तो एमआरपी के हिसाब से ही बेचेंगे। इसमें कोई गड़बड़ी नहीं है। नया स्टॉक आने के बाद कीमतें अपने आप कम हो जाएंगी। ऐसे में सरकार या सरकार के नुमाइंदों का व्यापक प्रचार -प्रसार या हूं कहे कि जीएसटी बचत उत्सव का कोई भी लाभ आम आदमी को नहीं मिलता दिखाई दे रहा है।







