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ममा, मेरी तो अभी किलकारी भी फूट नहीं सकी तो फिर ये क्या कर रही हो

PRATAPGARH NEWS: मासूम की अभी किलकारी भी फूट नही सकी, दुनिया जहान को देखने की उसकी हसरत लिये आंखों की पलकें भी झपकी तक न ले सकी। पखवारे भर बाद समाज व देश देवी आराधना के मंगलगीत गाने को आतुर हैं। उसी समाज की निष्ठुरता या फिर विवशता का क्रूर चेहरा भी बीच बीच में दिल दहला उठता है। बेटी पढ़ाओं बेटी बचाओ का जनमंत्र भी तब सिहर उठा जब कोख से बाहर आते ही एक मासूम को खुले आसमां के नीचे जिंदगी और मौत से जूझने का पहला पाठ पढ़ाये जाने का प्रयास किया गया। लालगंज नगर पंचायत के दीवानी वार्ड के मनीपुर में मंगलवार की सुबह खिली जरूर पर वह सामाजिक तानेबाने के लिए अमंगल के कोहरे में खुद को छिपाती लुकाती नजर आयी। धान के खेत में अलसुबह लावारिस मासूम नवजात को देख ग्रामीणों के चेहरे फक्क पड़ गये। धीरे धीरे नवजात को लेकर चर्चा जंगल में आग की तरह फैल गयी। वहां मौजूद हर किसी के चेहरे पर विस्मय था तो आंखों में नवजात की मां के सामने लोकलाज की निष्ठुरता का तीखा सवाल भी कौंध रहा था। कलिकाल के प्रभाव को लेकर भी लोग दांतों तले उंगली दबाए दिखे। नगर पंचायत कार्यालय भवन के पास नवजात बच्ची के होने की सूचना पुलिस को मिली। आननफानन में पुलिस मौके पर पहुंची और गांव की महिलाओं के सहारे उसे लालगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के महिला एवं प्रसूति विभाग में भर्ती करवाया। पैरामेडिकल स्टाफ में राय मशविरा नवजात के गर्भ में आठ माह तक होने की भी देखी सुनीं गयी। नवजात की गंभीर हालत देख डाक्टरों ने फौरन उसे ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखना मुनासिब समझा। नियति को देखिये मासूम नवजात को बेबसी ने एक एक सांस के लिए खुले आसमान के नीचे जददोजहद के लिए छोड़ दिया। वहीं नवजात को आधुनिक विज्ञान के भगवान के आक्सीजन सपोर्ट पर हर एक सांस जिंदा रखने की कवायद की जा रही है। प्रारंभिक उपचार एवं देखभाल के बाद नवजात प्रतापगढ़ चाइल्ड केयर सेण्टर भेजवाया गया है। वहीं इस वाकिये को जिसने भी सुना वह सब स्तब्ध देखे गये। … हर जुबां से एक ही शब्दों की गूंज का भाव तैर रहा था-हे राम।