JAUNPUR NEWS: सर्वोच्च न्यायालय के हालिया आदेश ने प्रदेश के लाखों शिक्षकों के भविष्य पर गहरी चिंता खड़ी कर दी है। 1 सितम्बर 2025 को दिए गए फैसले में कहा गया है कि जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पाँच वर्ष से अधिक शेष है, उन्हें आगामी दो वर्षों के भीतर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करना अनिवार्य होगा। इस निर्णय से उत्तर प्रदेश के लगभग 2.5 लाख शिक्षकों की नौकरी पर संकट मंडराने लगा है। उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने इस फैसले का विरोध जताते हुए प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षामंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है। संघ का कहना है कि यह निर्णय व्यावहारिक समस्याएं खड़ी कर रहा है और नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। संघ ने तर्क दिया कि 2011 से पहले नियुक्त शिक्षक टीईटी से मुक्त थे, जिसे भारत सरकार ने 2010 के राजपत्र में स्पष्ट किया था। बावजूद इसके, 2017 में संशोधन कर अचानक टीईटी को अनिवार्य बना दिया गया। संघ ने यह भी सवाल उठाया कि जिस याचिका पर फैसला हुआ, उसमें केवल महाराष्ट्र और तमिलनाडु पक्षकार थे, जबकि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों और शिक्षकों को सुना तक नहीं गया। शिक्षक संघ ने सरकार से मांग की है कि सेवा में कार्यरत शिक्षकों को टीईटी से स्थायी रूप से छूट दी जाए, अदालत में पुनः सुनवाई कराई जाए और आवश्यकतानुसार नियमों में संशोधन कर उनके हित सुरक्षित किए जाएं। इस निर्णय से शिक्षक मानसिक दबाव में हैं और शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।







