Home उत्तर प्रदेश रामलीला मंचन और मंचो की स्थिति खस्ताहाल

रामलीला मंचन और मंचो की स्थिति खस्ताहाल

VARANASI NEWS: आज़ से 31 लाख वर्ष पूर्व त्रेता युग में चलते हैं जहां मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम विष्णुलोक छोड़ कर पृथ्वी लोक पर धर्म की रक्षा और मानवता के कल्याण के लिए अवतार लेते है । इधर तब से 31 लाख वर्ष बाद आज भी काशी वासी प्रत्येक वर्ष अनंत चतुर्दशी  की शाम रामनगर पहुँचते हैं और समझिए फिर त्रेता युग में प्रवेश हो गए ! लालटेन की रोशनी, माथे पर तिलक, झोला में रामायण गुटका, हाथ में छड़ी, मुख में पान, इत्र से गमकता माहौल और बस समझिए शुरू हो गया विश्व प्रसिद्ध रामनगर की रामलीला  ! वाराणसी के संस्कृति की गरिमा और सनातन की आस्था का मंचन रामलीला जो  रामनगर की प्रथा है , इस वर्ष फिर शुरू हुई । इस ऐतिहासिक रामलीला के प्रथम दिन का भव्य शुभारंभ गंगा मैया के देखरेख में हुआ । विश्वप्रसिद्ध रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला का शुभारंभ परंपरागत धार्मिक अनुष्ठानों और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ। सदियों पुरानी इस रामलीला में आज भी वही परंपरा कायम है, जहाँ आधुनिक मंच सज्जा या कृत्रिम रोशनी के बजाय प्राकृतिक परिवेश और वास्तविक पात्रों के अभिनय से धार्मिक प्रसंग जीवंत हो उठते हैं। जनपद के पत्रकार और प्रदेश मीडिया के विश्लेषक पंकज सीबी मिश्रा ने बताया कि मंचन के प्रथम दिवस पर बालकांड का मंचन किया हुआ, जिसमें राम जन्म और ताड़का वध जैसे प्रसंगों को दर्शाया गया। संवाद और गीतों के माध्यम से कलाकारों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।