Home उत्तर प्रदेश किसानों तक पहुंचाई जा रही कृषि लागत योजना की जानकारी

किसानों तक पहुंचाई जा रही कृषि लागत योजना की जानकारी

45 जिलों और 75 तहसीलों से जुड़ा है विश्वविद्यालय

JHANSI NEWS: रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला में कृषि लागत योजना पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यशाला में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, प्राध्यापकों और फील्ड मैनों ने सक्रिय भागीदारी की।
विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता:कुलपति
कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि कृषि लागत योजना किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है। उन्होंने बताया कि फील्ड मैन न केवल योजना के क्रियान्वयन में बल्कि विश्वविद्यालय से जुड़े अन्य हितकारी कार्यों में भी सहयोग करेंगे। कुलपति ने किसानों की आय दोगुनी करने और खेती को टिकाऊ बनाने के लिए विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दोहराया।
45 जिलों और 75 तहसीलों तक सीधा जुड़ाव:नोडल अधिकारी
नोडल अधिकारी एवं निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. सुशील कुमार सिंह ने बताया कि इस योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश के 45 जिलों और 75 तहसीलों से सीधा जुड़ाव हो रहा है। इससे किसानों तक विश्वविद्यालय की नई तकनीकी जानकारी और कृषि संबंधी परामर्श तेजी से पहुँच रहे हैं।
किसानों तक वैज्ञानिकों की जानकारी पहुँचाने में फील्ड मैन की अहम भूमिका
कार्यशाला में डॉ. धर्मवीर सिंह ने कहा कि किसानों को योजना की बारीकियों से अवगत कराने में फील्ड मैनों की भूमिका महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की जानकारी को फील्ड तक पहुँचाने में फील्ड मैन कड़ी मेहनत कर रहे हैं।
तकनीकी सत्र व प्रस्तुतिकरण
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों और वैज्ञानिकों ने विभिन्न तकनीकी बिन्दुओं पर जानकारी साझा की। वहीं सभी फील्ड मैनों ने अपने-अपने कार्यों का प्रस्तुतिकरण किया।
आँकड़ों के आधार पर तय होता है न्यूनतम समर्थन मूल्य
फील्ड मैन किसानों की भागीदारी में आँकड़े एकत्र करते हैं और इन आँकड़ों को सॉफ़्टवेयर के माध्यम से कृषि लागत परियोजना में सांख्यिकी व अर्थशास्त्र निदेशालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार को भेजते हैं। इन्हीं आँकड़ों के आधार पर मंत्रालय द्वारा महत्त्वपूर्ण फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रत्येक वर्ष खरीफ व रबी मौसम के लिए निर्धारित किया जाता है।