राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता ने संसद की कार्रवाई में अर्धसैनिक बलों के सदन में पहुंचने को बताया भाजपा की तानाशाही
PRATAPGARH NEWS: राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने बिहार में निर्वाचन आयोग द्वारा ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में पैंसठ लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने को चिंताजनक कहा है। उन्होने आरोप लगाया है कि बिहार में भाजपा के इशारे पर निर्वाचन आयोग द्वारा बड़े पैमाने पर मतदाताओं का नाम हटाया जाना लोकतंत्र पर आक्रमण है। राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने यह भी आरोप जड़ा है कि काटे गये नाम ज्यादातर विपक्षी दलों के परम्परागत वोट हैं। उन्होने कहा कि मतदाता सूची से आयोग द्वारा पिछड़े व दलित तथा कमजोर सवर्ण तबके के नाम जानबूझकर हटा दिये गये हैं। उन्होने कहा कि आयोग द्वारा जिस प्रकार से विपक्षी दलों के परम्परागत लाखों वोट काटे गये हैं उससे आयोग की भूमिका विश्वसनीय नही रह गयी है। राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने कहा कि जिन निर्वाचन क्षेत्रों में दो से चार अथवा दस पांच हजार की हार जीत का अंतर हुआ करता है वहां पैंसठ लाख वोट कटने से जनादेश का अपमान होगा। राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने कर्नाटक में भाजपा के सहयोगी जदएस के पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को विशेष अदालत द्वारा दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराये जाने को भाजपा के बेटी बचाओं तथा बेटी पढ़ाओ के नारे के लिए शर्मनाक कहा है। उन्होने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के पौत्र प्रज्वल रेवन्ना को दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया जाना भाजपा के चाल चरित्र व चेहरे को बेनकाब कर गया है। वहीं राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने संसद सत्र में सदन के भीतर अर्धसैनिक बलों के द्वारा सांसदों को नियंत्रित करने की कार्रवाई को संसदीय मर्यादा एवं परम्परा के लिए कुठाराघात कहा है। उन्होने कहा कि नियम है कि संसद के किसी भी सदन में पुलिस तक प्रवेश नही कर सकती। उन्होने कहा कि लोकतंत्र के मंदिर में संगीनों के साये में इस प्रकार का कदम भाजपा की तानाशाही की पराकाष्ठा है। उन्होने सवाल उठाया है कि क्या संसद की कार्रवाई सशस्त्र बल के बूते संचालित करायी जाएगी। राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी का बयान शनिवार को यहां मीडिया प्रभारी ज्ञानप्रकाश शुक्ल के हवाले से निर्गत हुआ है।







