SAHARANPUR NEWS: पहली मोहर्रम से आयोजित हो रही अजादारी की मजलिसों का मुख्य विषय अशीरा से आशूर तक है। जिसमें पैग़ंबर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सलाहुअलैही वसल्लम की पैदाइश और उनके मिशन पर रौशनी डाली जा रही है. शनिवार देर रात मोहल्ला हामिद हसन में स्थित बड़े इमाम बाड़े में आली जनाब मौलाना मोहम्मद खुर्शीद आलम साहब कलकत्ता-वी ने सम्बोधित करते हुए फ़रमाया कि रसूल-ए-अकरम (स.) ऐसे इलाक़े में पैदा हुए जो जहालत, नैतिक पतन और ज़ुल्म का शिकार था। उस समाज में औरतों की ख़रीद-फ़रोख़्त, क़बीलाई तअस्सुब और इल्म व अक़्ल की कमी आम थी। लेकिन अल्लाह के रसूल (स.) ने वही के ज़रिए उस तारीक (अंधकारमय) समाज को उजाले में बदल दिया, इंसानियत को इज़्ज़त, एहतेराम और अद्ल व मुसावात (न्याय और समानता) की दौलत अता फरमाई। मौलाना ने आगे फ़रमाया कि नबी-ए-अकरम (स.) का यह मिशन उनके बाद अहलेबैत (अ.) ने जारी रखा, जिन्होंने इस्लाम के असली पैग़ाम की हिफाज़त और तशहीर में कोई कमी नहीं आने दी। इमाम हुसैन (अ.) ने कर्बला के मैदान में इसी मिशन को बचाने के लिए अपनी और अपने घर वालों की क़ुर्बानी दी, जो तारीख-ए-इंसानियत में हमेशा याद रखी जाएगी। मजलिस के आखिर में इमाम हुसैन (अ.) और शुहदाए कर्बला के दर्दनाक मसायब बयान किए गए। मर्सिया तासीर हुसैन ने पढ़ा, नोहा ज़ैनुल आबेदीन, आज़म, फैज़, समर अब्बास व संजू ने पढ़ा, सोगवार सदर अली इमाम, मूसा इमाम,शालू, तारीफ़, अब्बास, काजिम, अलमदार, शहबाज, जाबिर, गाज़ी, चंदू, भोलू जावेद, शानू, मिंटू, मुकर्रम, जमाल आदि सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।







