पुल के बार – बार धंसने व सड़कों के टूटने का मुद्दा उठा
FATEHPUR NEWS: 92 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित किशनपुर-दांदो यमुना पुल एक बार फिर विवादों में है। केवल दो वर्षों में पाँचवीं बार रास्ता बंद करना पड़ा है। बुंदेलखंड राष्ट्र समिति ने इस बार इसे “भ्रष्टाचार का स्पष्ट उदाहरण” बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की माँग की है। बताते चलें कि जुलाई के अंत में चालू हुआ पुल का पहुंच मार्ग 2 अगस्त की रात को एक बार फिर धंस गया। इससे पहले अक्टूबर 2024 में भी यही समस्या आई थी। तुर्की नाला पुल और यमुना पुल के बीच सड़क की दरार ने राहगीरों की चिंता और विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 2016 में शुरू हुए इस पुल का निर्माण 2024 में पूरा हुआ। शुरुआत में 67 करोड़ का बजट था, जो बढ़कर 91.86 करोड़ हो गया। निर्माण के दौरान पुल के पिलर 32 से बढ़ाकर 35 किए गए, और 1325 मीटर लंबा पहुंच मार्ग तैयार किया गया। लेकिन किशुनपुर की ओर बार-बार सड़क धंसना तकनीकी लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
सबसे चिंताजनक स्थिति तुर्की नाला पुल की है, जिसे 30 दिन पहले खोला गया था। सिर्फ चार दिन की मामूली बाढ़ में ही इस पुल के पत्थर फिर से धंसने लगे। विभाग को फिर बल्लियां गाड़कर रास्ता बंद करना पड़ा, जिससे झांसी, ललितपुर, महोबा, चित्रकूट, ग्वालियर, सतना समेत सैकड़ों क्षेत्रों के वाहनों को लौटाया जा रहा है।
इस पूरे मामले में बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के केंद्रीय अध्यक्ष प्रवीण पांडेय मौके पर पहुंचे और कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि “92 करोड़ की लागत से बनी परियोजना दो साल भी नहीं टिक पा रही है, यह सीधा-सीधा भ्रष्टाचार का मामला है। इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषियों को जेल भेजा जाना चाहिए।” उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि भ्रष्ट इंजीनियरों, ठेकेदारों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो जनांदोलन की रणनीति अपनाई जाएगी। हालांकि इस प्रकरण के गंभीर होने पर अधिशासी अभियंता अनिल कुमार शील का कहना है कि “पहुंच मार्ग की मरम्मत चल रही है। यमुना नदी में बाढ़ से मिट्टी कट गई है, जिससे कुछ स्थानों पर सड़क धंसी है। पुल में किसी प्रकार की दरार नहीं है। जल्द ही आवागमन बहाल कर दिया जाएगा।” इंजीनियर प्रवीण पांडेय के अनुसार यमुना के जलभराव क्षेत्र में सड़क निर्माण करना विनाश की योजना जैसा है। जब तक तुर्की नाला की ओर पांच अतिरिक्त पिलर नहीं बनाए जाएंगे, तब तक यह समस्या बार-बार सामने आती रहेगी। इस मामले में श्री पाण्डेय द्वारा प्रश्न उठाया गया है कि जब पुल बार-बार धंसता है, सड़कें दरकती हैं और जनता परेशान है, तो आखिर जिम्मेदार कौन?







