दरवाजे की कुंडी और खिड़की की मरम्मत होने पर दिया आशीर्वाद
JALAUN NEWS: जन सुनवाई मंच मानवीय संवेदनाओं का जीवंत प्रमाण बनता जा रहा है। बुधवार को उरई स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में एक मार्मिक दृश्य देखने को मिला। लगभग 90 वर्षीय एक बुजुर्ग महिला अपनी सादी साड़ी, झुकी कमर और कांपते हाथों के साथ जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय के सामने पहुंची। इस वृद्धा ने करीब 15 दिन पहले जनसुनवाई में अपनी समस्या रखी थी। उनके घर में दरवाजे की कुंडी टूट गई थी और एक खिड़की भी खराब थी। वह अकेली रहती हैं और घर में उनके सिवा कोई नहीं है। यह केवल एक शिकायत नहीं थी, बल्कि एक अकेली वृद्धा की असुरक्षा और लाचारी का प्रतीक था। जब मरम्मत का कार्य पूरा हो गया, तो बुजुर्ग महिला जिलाधिकारी का आभार व्यक्त करने स्वयं कलेक्ट्रेट पहुंचीं। उन्होंने जिलाधिकारी के कंधे पर हाथ रखते हुए भर्राई आवाज में कहा, “बेटा, चिरंजीवी भवः”। यह उनके दिल से निकला सच्चा आशीर्वाद था, जो प्रशासन की संवेदनशीलता के प्रति जनविश्वास को दर्शाता है।जिलाधिकारी ने पहले ही उनकी समस्या को गंभीरता से लिया था। उन्होंने तुरंत प्रार्थना-पत्र पढ़कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। कार्य पूरा होने की सूचना देने आई वृद्धा की आंखों में संतोष और विश्वास झलक रहा था। मौके पर उपस्थित महिला पुलिस अधिकारी और अन्य लोग इस क्षण की मानवीय गरिमा से अभिभूत थे। यह दृश्य शासन और प्रशासन की जमीनी सक्रियता का प्रतीक था। यह सिद्ध करता है कि जब संवेदनशीलता से कार्य होता है, तो सबसे कमजोर आवाज भी सुनी जाती है। यह सिर्फ एक टूटी कुंडी और खिड़की की बात नहीं थी। यह उस भरोसे की गूंज थी, जिसे प्रशासन ने सम्मान के साथ सुना और स्नेहपूर्वक सुलझाया।







