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35 लेखपालों के क्षेत्र में किए गए परिवर्तन, 17 लेखपालों को अतिरिक्त क्षेत्र की मिली जिम्मेदारी मऊआइमा की जनता ने ली राहत की सांस

ग्राम मकदुमपुर में 88 बीघा भूमि भूमाफियों के कब्जे से निकाल कर ग्राम सभा के खाते में वापस दर्ज कराई। पिछले सप्ताह ग्राम महरूडीह की 16 करोड़ कीमत की भूमि जो पूर्व में अस्पताल के लिए चिन्हित थी, भूमाफिया के नाम खारिज कर ग्राम सभा खाते में वापस दर्ज कराई।

प्रयागराज। जमीनों की बढ़ती कीमत, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर जैसी योजनाओं से तहसील सोरांव पर भूमाफियों की सक्रियता बढ़ी है।राजस्व कर्मकरचारियों से मिलकर इनका खेल एक दशक से जारी है।उप जिलाधिकारी सोरांव हीरालाल सैनी ने सधे कदमों से इन पर जोरदार प्रहार किया है।
जुलाई में ग्राम मकदुमपुर में 88 बीघा भूमि भूमाफियों के कब्जे से निकाल कर ग्राम सभा के खाते में वापस दर्ज कराई। पिछले सप्ताह ग्राम महरूडीह की 16 करोड़ कीमत की भूमि जो पूर्व में अस्पताल के लिए चिन्हित थी, भूमाफिया के नाम खारिज कर ग्राम सभा खाते में वापस दर्ज कराई। जमीनी स्तर पर कार्य की परख के लिए दिनांक 20 सितंबर को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के बाद जिलाधिकारी ने लेखपालों के साथ 30 मिनट बैठक के बाद बार अधिवक्ता संघ एवं पत्रकारों के साथ भी अलग – अलग बैठक ली थी, जिसमें कई लेखपालों की कार्य प्रणाली पर शिकायत की गई थी। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने जमीनी स्तर पर सुधार के निर्देश उपजिलाधिकारी सोरांव को दिए थे।
लेखपालों की लगातार शिकायत मिल रही थी। कुछ प्रभावशाली लेखपाल एक, एक क्षेत्र में 3 – 3 साल से ज्यादा समय से काम कर रहे हैं। लेखपालों की कम संख्या का फायदा लेकर कुछ प्रभावशाली लेखपाल दो, दो , तीन, तीन मलाईदार क्षेत्रों का चार्ज ले रखा था। 3 साल की सीमा से बचने के लिए दूसरे मलाईदार क्षेत्र में स्थानांतरण कराकर पुराने क्षेत्र का प्रभारी का चार्ज ले लेने का खेल चल रहा है।
कस्बे में तैनात एक लेखपाल जो खुद प्रभावशाली है तथा माननीय लोगों का भी बरदहस्त प्राप्त है,लोगों में उसकी कार्यप्रणाली से निराशा इस तरह व्याप्त थी कि अब 6 महीने ( सेवा निवृत) बाद ही इनसे निजात मिलेगी।
उपजिलाधिकारी सोरांव हीरालाल सैनी ने 3 वर्ष से अधिक एक ही क्षेत्र में कार्यरत 11 लेखपाल तथा प्रशिक्षण से वापस आए 26 लेखपालों को तैनाती तथा राजस्व निरीक्षको के क्षेत्रों में संतुलन लाने के लिए 35 लेखपालों के क्षेत्र में परिवर्तन किया है जबकि 17 लेखपालों को अतिरिक्त क्षेत्र का कार्यभार दिया गया है। कल देर रात किए गए स्थानांतरण से मठाधीश लेखपालों में अचानक सन्नाटा व अन्दर से कसमकस है। लोगों में अब भी संशय है कि लेखपालों का आका अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके अपने तबादले को रुकवा सकता है।