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30वीं अखिल भारतीय समन्वित रबी दलहन अनुसंधान परियोजना की वार्षिक बैठक का हुआ शुभारम्भ

बुंदेलखण्ड है दलहन का खजाना – डॉ. मांगीलाल जाट

JHANSI NEWS: रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी में 19 – 21 अगस्त तक तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वित रबी दलहन शोध परियोजना की वार्षिक बैठक का भव्य शुभारम्भ हुआ, इसमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली (आईसीएआर) के महानिदेशक एवं कृषि शोध एवं शिक्षा विभाग, भारत सरकार के सचिव डॉ. मांगी लाल जाट, कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, के उप-महानिदेशक (फसल विज्ञान), डॉ. डी.के. यादव, भारत सरकार में संयुक्त सचिव (प्रसार व दलहन) संजय कुमार अग्रवाल (आईएएस), परियोजना समन्वयक (रबी दलहन) डॉ. शैलेश त्रिपाठी, भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर के निदेशक डॉ. जीपी दीक्षित, सहायक महानिदेशक तिलहन एवं दलहन फसलें डॉ. संजीव गुप्ता, निदेशक शोध डॉ. एसके चतुर्वेदी ने संयुक्त रूप से मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पमाला पहनाकर व दीप प्रज्जवलित कर 30वीं अखिल भारतीय समन्वित रबी दलहन परियोजना की वार्षिक बैठक का विधिवत उद्घाटन किया। मुख्य अतिथि डॉ. मांगी लाल जाट ने सर्वप्रथम झाँसी की रानी वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई को नमन किया व अपने संबोधन में कहा कि बुंदेलखण्ड है दलहन का खजाना, दलहन की हैं यहां अपार संभावनाएं हैं। देश में दलहन की उत्पादन एवं उत्पादकता को बढ़ाये जाने की आवश्यकता है। इसके लिए क्षेत्र आधारित मापदंण्डो व विकल्पीय फसल तंत्रों में दलहन को बढ़ावा देने व गुणवत्तायुक्त शोध करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। साथ ही उन्होंने दलहन में भारत को आत्मनिर्भर बनाने पर बल दिया। कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने इस आयोजन पर प्रशन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बुंदेलखण्ड में जलवायु परिवर्तन के हिसाब से दलहन की विभिन्न किस्मों को तकनीकी आधारित शोध करके आगे बढ़ाया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने वैज्ञानिक एवं किसानों के बीच समन्वय बढ़ाने की बात कही।
उप-महानिदेशक डॉ. डी.के. यादव ने दलहनी फसलों की पोषण सुरक्षा में योगदान को परिभाषित किया एवं कहा कि पूरे देश में 52 केन्द्र और लगभग 325 वैज्ञानिक दलहनी फसलों के शोध हेतु समर्पित हैं। देश में दलहनी फसलों के आयात में कमी आई है किंतु हमें अपनी क्षमता का वर्धन एवं किसानों की भूमि पर दलहनी फसलों की तकनीक का प्रदर्शन करना होगा।
संयुक्त सचिव संजय कुमार अग्रवाल (आईएएस) ने बताया कि भारत दलहन मिशन की स्थापना पर कार्य कर रहा है व सरकार लगातार दलहन की उत्पादकता बढ़ाने एवं किसानों के सहयोग की नियमावली गठन पर जोर दे रही है।  
भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर के निदेशक डॉ. जीपी दीक्षित ने दलहनी फसलों पर लगने वाले रोगों की चुनौतियों से अवगत कराया व दलहनी फसलों की मशीन आधारित किस्मों को देश भर में बढ़ाये जाने की बात कही।
परियोजना समन्वयक डॉ. शैलेश त्रिपाठी ने विगत एक वर्ष में देश भर में रबी दलहन की शोध सफलताओं का विवरण प्रस्तुत किया एवं आगामी चुनौतियों से अवगत कराया। तीन दिन तक चलने वाले इस संगोष्ठी में लगभग 10 संस्थानों के निदेशक व 52 केन्द्रों के 150 से अधिक वैज्ञानिकों ने भाग लिया। आगामी तकनीकी सत्रों में रबी दलहन फसलों की विभिन्न आयामों में शोध हेतु चर्चा एवं प्रस्तुतिकरण होगा।  इस अवसर पर केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी स्थित स्पीड ब्रीडिंग फसल सुविधा व पादप आनुवांशिक संसाधन केन्द्र का विधिवत उद्घाटन मुख्य अतिथि व गणमान्य अतिथियों के द्वारा किया गया। इन सुविधाओं से छात्र-छात्राओं, वैज्ञानिकों की शोध क्षमताओं का विकास होगा साथ ही किसान भी लाभान्वित हो सकेंगे। विश्वविद्यालय में नवीन महिला एवं पुरूष छात्रावास का शिलान्यास भी अतिथियों द्वारा किया गया। अतिथियों द्वारा प्रातःकालीन पौधरोपण किया गया व विश्वविद्यालय के फार्म प्रक्षेत्र का भ्रमण करते हुए आवश्यक सुझाव वैज्ञानिकों से साझा किए।
अखिल भारतीय समन्वित रबी दलहन शोध परियोजना की वार्षिक रिपोर्ट का विमोचन भी इस अवसर पर किया गया। साथ ही विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित विजन-2047 व विश्वविद्यालय की 10 वर्षों की यात्रा पर समर्पित बुलेटिन “ए – डिकेड ऑफ एक्सीलेंस”  का भी विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया।
कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय उत्पादों को अतिथियों को भेंट किया व कार्यक्रम की सार्थकता पर बल दिया। कार्यक्रम संयोजक विश्वविद्यालय के निदेशक शोध डॉ. एसके चतुर्वेदी ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए स्वागत संबोधन प्रस्तुत किया।