जनाज़े पर बरसे तीर, मसायब सुन गम-ए-हसन में रो पड़े अज़ादार
MIRZAPUR NEWS: (शाहिद वारसी) पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नवासे और हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के बड़े भाई हजरत इमाम हसन अलैहिस्सलाम की 28 सफर को यौमे-ए-शहादत के मौके पर बुधवार की देर रात को वासलीगंज स्थित मरहूम एस. तनवीर रजा के आवास से ताबूत, अलम और जुलजुनाह का मातमी जुलूस निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। जुलूस से पहले मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस में नफीसुल रिजवी ने इमाम हसन अलैहिस्सलाम के मसायब बयान किए। उन्होंने बताया कि इमाम हसन अलैहिस्सलाम को जहर दिए जाने के बाद उनकी हालत बेहद खराब हो गई थी। जहर का असर इतना तेज था कि उनके जिगर के टुकड़े निकलकर बाहर आने लगे। इमाम हसन अलैहिस्सलाम ने इस दर्द को भी सब्र के साथ सहन किया। उन्होंने बताया कि जिस नाना के आंगन में इमाम हसन अलैहिस्सलाम बचपन में खेले थे, उसी नबी के नवासे को जहर देकर शहीद कर दिया गया। इमाम हसन अलैहिस्सलाम की हालत बिगड़ती गई और अहलेखाना उनके गम में रोते रहे। मसायब सुनकर अजादारों की आंखों से आंसू जारी हो गए। किसी की आंखें नम थीं तो कोई इमाम हसन अलैहिस्सलाम की याद में सीने पर हाथ मारकर मातम कर रहा था। इसके बाद अंजुमन अंसार-ए-हुसैन, अंजुमन-ए-हैदरी और अंजुमन लश्कर-ए-हुसैन ने नौहाख्वानी की। दर्द भरे नौहों से माहौल गमगीन हो गया। अजादार नौहाख्वानी और सीनाजनी करते हुए जुलूस के साथ आगे बढ़ते रहे। पूरे रास्ते ‘हाय हाय हसन’ की सदाएं बुलंद होती रहीं। अजादार इमाम हसन अलैहिस्सलाम की शहादत को याद करते हुए गम का इजहार करते रहे। ताबूत और अलम की जियारत के लिए लोगों की भीड़ उमड़ती रही। शहर कोतवाली पुलिस की निगरानी में जुलूस अपने पारंपरिक मार्गों से होता हुआ इमामबाड़ा स्थित कर्बला पहुंचकर शांतिपूर्वक संपन्न हुआ। इस मौके पर सैयद अली रजा, सैयद फरहान रजा, फैसल अब्बासी, मुजम्मिल हुसैन, वसी रिजवी, काविश रिजवी, सानू अली, आसिफ अब्बासी, समीर अली और साहिल समेत अन्य लोग मौजूद रहे।







