MIRZAPUR NEWS: आज़ादी का जश्न और ईमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का गम इस बार हिंदुस्तान दोनों जज़्बातों को एक साथ महसूस करेगा। आज़ादी के 78 साल पूरे होने की तैयारियां पूरे जोश में हैं, लेकिन साथ ही इमाम हुसैन अ.स. के चेहल्लुम का भी दिन है। इस मौके पर मीरजापुर के मशहूर सूफी मौलाना अबरार हुसैन वारसी साहब ने नगर वासियों को एक खास पैग़ाम दिया है। अल्लामा साहब ने कहा कि 15 अगस्त हमारे लिए दोहरी अहमियत रखता है। एक तरफ़ ये वतन की आज़ादी का दिन है तो दूसरी तरफ़ हमारे दिलों में कर्बला का ग़म भी ताज़ा होगा। ईमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने इंसाफ़, इंसानियत और कुर्बानी का सबक दिया और हमारे शहीदों ने उसी राह पर चलकर मुल्क को आज़ाद कराया। अल्लामा साहब ने आगे कि “बताया कि ये वही हिंदुस्तान है जहां मौला हुसैन अलैहिस्सलाम आने की ख्वाहिश रखते थे” हिंदुस्तान एक ऐसी ज़मीन जहां मोहब्बत, इंसाफ़ और कुर्बानी की कद्र होती है। हर सच्चा वतनपरस्त इंसान भी ईमाम हुसैन का पैरोकार है, क्योंकि ईमाम हुसैन ने ही सिखाया कि “ज़ुल्म के आगे सिर झुकाना गुनाह है।” हिंदुस्तान की आज़ादी लाखों शहीदों की कुर्बानी का नतीजा है। वही कुर्बानी का जज़्बा कर्बला के मैदान में भी नज़र आता है जहां इमाम हुसैन अ.स. ने हक़ और इंसाफ़ के लिए अपने परिवार समेत अपनी जान की कुर्बानी दी। “ऐ वतन! तू हमारी शान है, तेरे लिए लाखों ने जान दी और एक तरफ़ जहां आज हम तेरी आज़ादी का जश्न मना रहे होंगे वहीं दूसरी तरफ हमारे दिलों में ईमाम हुसैन अ.स. के ग़म भी रहेगा। पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे, जिनके खून ने आलम-ए-इस्लाम को बचाया। जिनकी क़ुरबानी इंसाफ़ और इंसानियत की मिसाल बनी। पअल्लामा साहब ने बताया कि “चेहल्लुम के दिन अलम और ताज़िया को देखकर आंखों में कर्बला का मंजर घूमने लगेगा रेत का तपता मैदान, प्यास से तड़पता नन्हा अली असगर, और तीरों से छलनी इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का जिस्म याद आएगा।”
हाय मेरा मज़लूम हुसैन हाय मेरा मज़लूम हुसैन
अल्लामा साहब ने लोगों से अपील की कि इस बार 15 अगस्त को हर घर पर तिरंगा भी लहराए और हुसैनी जुलूस में भी शामिल हों।” ईमाम हुसैन की अज़ादारी और मुल्क से वफ़ादारी दोनों हमारे ईमान का हिस्सा हैं। यही हमारी असली पहचान है। इस साल 15 अगस्त को हिंदुस्तान के आसमान में तिरंगा भी बुलंद होगा और मौला अब्बास अलैहिस्सलाम का अलम भी बुलंद होगा।







