जगदगुरू स्वामी घनश्यामाचार्य महराज ने कथा में कहा
निर्मल हृदयए शुद्ध विचारए विनम्र स्वभाव वाला कहलाता सुंदर
PRAYAGRAJ NEWS: श्री मज्जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी घनश्यामाचार्य जी महाराज ने कहा कि जिन घरों में मांसए शराबए व्यभिचार और दुर्व्यवहार जैसे अधार्मिक कृत्य होते हैंए उन घरों में कलयुग का प्रभाव गहराई से प्रवेश कर जाता है। जब किसी घर में कलयुगी प्रवृत्तियाँ पनपती हैंए तो वहां मानसिक अशांतिए कलहए बीमारी और विघटन जैसे परिणाम स्वतः ही उत्पन्न हो जाते हैं। ऐसा घर धीरे.धीरे पतन की ओर अग्रसर होता है। यह बातें स्वामी घनश्यामाचार्य महराज ने कथा के दौरान आज मटियारा रोड स्थित भगवान लक्ष्मी नारायण मंदिर में कही। उन्होंने कहा कि हिंदू और सनातन धर्म की रक्षा के लिए श्सनातन बोर्डश् का गठन अत्यंत आवश्यक हैए जो धर्मए शिक्षाए संस्कृति और समाज को एकजुट रखेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए सनातन मूल्यों की रक्षा करेगा। उन्होंने कहा कि आजकल कुछ सनातनीए आध्यात्मिक लाभ की लालसा में भूत.प्रेत और नकारात्मक शक्तियों की पूजा तक करने लगे हैं। यह सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों के विपरीत है। सनातन धर्म हमेशा सत्यए प्रकाश और ईश्वर की भक्ति की ओर अग्रसर करता हैए न कि अंधविश्वास और तामसिक प्रवृत्तियों की ओर। स्वामी घनश्यामाचार्य महराज ने कहा कि यदि एक पिशाच योनि में पड़े धुंधकारी का उद्धार भागवत कथा के श्रवण मात्र से हो सकता हैए तो आज के मनुष्य का कल्याण क्यों नहीं हो सकताघ् भगवान के नामए कथा और मंत्रों में इतनी शक्ति है कि वे व्यक्ति को अज्ञानताए पाप और दुःखों से उबार सकते हैं। उन्होंने कहा कि मंत्र जाप और भक्ति में इतनी ताकत होती है कि वह स्वयं भगवान को भी अपनी ओर आकर्षित करने में सक्षम होता है। जिस प्रकार अर्जुन ने कुरुक्षेत्र में धर्म की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण के निर्देशों पर खड़ा होकर धर्म युद्ध लड़ाए वैसे ही आज के समय में हर सनातनी को अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए सजग रहना होगा। स्वामी घनश्यामाचार्य महराज ने सुख.दुरूख जीवन के स्वाभाविक अंग हैं और इनका आना.जाना प्रकृति का नियम है इसलिए हर मनुष्य को मानसिक रूप से इन उतार.चढ़ावों के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए। जो व्यक्ति इन दोनों को समान भाव से स्वीकार करता हैए वही सच्चा ज्ञानी और संतुलित जीवन जीने वाला होता है। स्वामी घनश्यामाचार्य महराज ने कहा कि हमारी जिंदगी में प्रतिदिन क्या होगाए किससे मिलेंगेए क्या खोएंगे और क्या पाएंगे कृ यह सब भगवान की लीला का ही भाग है। हमारे कर्मों का प्रभाव भी हमारे जीवन पर पड़ता है। इसलिए नियति के साथ.साथ हमें अच्छे कर्म करने चाहिए ताकि हमारा जीवन दिशा और उद्देश्य से भरपूर रहे।
स्वामी घनश्यामाचार्य महराज ने कहा कि आज बहुत से स्कूलों में बच्चों को हाथ में कलावा बांधने और माथे पर तिलक लगाने से रोका जा रहा है। यह अत्यंत चिंताजनक और हमारी संस्कृति के अपमान के समान है। हर माता.पिता का यह कर्तव्य बनता है कि वे ऐसे स्कूलों में जाकर इसका विरोध करें और अपने बच्चों को धर्म से जुड़ी पहचान के साथ आगे बढ़ने का अधिकार दिलवाएँ। स्वामी घनश्यामाचार्य महराज ने कहा कि सच्चा सौंदर्य तन से नहींए मन और व्यवहार से होता है। शरीर की सुंदरता क्षणिक होती हैकृवह समयए उम्र और परिस्थितियों के साथ बदल जाती है। लेकिन एक सुंदर मन और सुसंस्कृत व्यवहार सदा स्थायी होते हैं। जिस व्यक्ति का हृदय निर्मलए विचार शुद्ध और स्वभाव विनम्र होता हैए वही वास्तव में सुंदर कहलाने योग्य होता है।
श्रृंगवेरपुर पीठाधीश्वर श्रीमद जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी नारायणाचार्य शांडिल्य जी महाराज ने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर अलोपीबाग में 28 दिसम्बर तक होगी जिसके मुख्य यजमान शम्भू नाथ केशरवानी है। कथा प्रतिदिन अपराह्न तीन बजे से शाम छह बजे तक होगी।







