Home उत्तर प्रदेश हज़रत अली की शहादत पर दारानगर में जुलूस और शबीहे ताबूत बरामद

हज़रत अली की शहादत पर दारानगर में जुलूस और शबीहे ताबूत बरामद

डूबा हुआ लहु में मुसल्ला अली(अ.स.) का है अल्लाह कैसा आज ये सजदा अली (अ.स) का है

KAUSHAMBI NEWS: नगर पंचायत दारानगर कड़ा धाम के सय्यदवाड़ा  में बुधवार को हज़रत अली(अ.स) की शहादत के मौके पर शिया समुदाय द्वारा  जुलूस व शबीहे ताबूत निकाला गया। इस दौरान गमगीन माहौल में अकीदतमंदों ने नोहा और मातम पेश किया जुलूस से पहले मजलिस का आयोजन किया गया, जिसे मौलाना सय्यद आबिद हुसैन रिजवी ने पढ़ा। मजलिस में उन्होंने हज़रत अली(अ.स) की  ज़िंदगी पर रोशनी डालते हुए कहा कि हज़रत अली(अ.स) ने अपने दौर-ए-हुकूमत में इंसाफ और इंसानियत की मिसाल कायम की। उन्होंने हमेशा यतीमों, गरीबों और कमजोर लोगों की मदद की और सभी को बराबरी का अधिकार दिया। उनके शासनकाल में कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं रहता था।मौलाना ने हदीस का हवाला देते हुए कहा कि पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद (स.अ.व.) ने फरमाया है
अना मदीनतुल इल्म वा अलीयुन बाबुहा
अर्थात मैं इल्म का शहर हूं और अली उसका दरवाज़ा हैं
मजलिस के बाद अकीदतमंदों ने हज़रत अली(अ.स)का ताबूत उठाकर मस्जिद से इमामबाड़ा तक  जुलूस निकाला। जुलूस में शामिल लोग नोहा पढ़ते हुए
ऐ रोज़ादारों रोज़ ये आहो बुका का है
की सदाओं के साथ मातम करते हुए इमामबाड़ा पहुंचे, जहां पर मातम और नोहाख्वानी की गई। इस अवसर पर बकर अली उर्फ इशरत, अली अब्बास, अरमान सहित अन्य नोहाख्वानों ने दर्द भरे नोहे पढ़े और अकीदतमंदों ने सीना ज़नी कर गम-ए-अली का इज़हार किया। बड़ी संख्या में शिया समुदाय के लोग मौजूद रहे।
कौशाम्बी इसी तरह कड़ा  में भी हज़रत अली(अ.स.)की शहादत के मौके पर शिया समुदाय के लोगों ने  जुलूस निकाला और ताबूत बरामद किया। जुलूस में शामिल अकीदतमंदों ने नोहा पढ़ते हुए मातम किया और हज़रत अली की कुर्बानियों को याद कर उन्हें खिराज-ए-अकीदत पेश की।