PRAYAGRAJ NEWS: मंगलवार देश में सामाजिक सौहार्द और आपसी सम्मान को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। स्वामी मुक्तेश्वर आनंद द्वारा वरिष्ठ समाजसेवी देश के लिया अपना जीवन समर्पित करने वाले एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्व डॉ. इंद्रेश कुमार के खिलाफ दिए गए बयान को लेकर मुस्लिम राष्ट्रीय मंच में गहरी नाराज़गी देखने को मिल रही है। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के पूर्वी उत्तर प्रदेश सह सयोजक फरीद सबरी प्रयागराज ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे अत्यं दुर्भाग्यपूर्ण अनुचित और निंदनीय बताया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा और आरोप न केवल एक सम्मानित व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं बल्कि समाज में अनावश्यक तनाव और वैमनस्य का वातावरण भी पैदा करते हैं। समाज में नफरत फैलाने वाली बयानबाज़ी बर्दाश्त नहीं। फरीद सबरी ने अपने बयान में कहा कि आज के समय में जब देश को एकता,सद्भाव और भाईचारे की सबसे अधिक आवश्यकता है तब इस प्रकार की बयानबाज़ी समाज को विभाजित करने का कार्य करती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी व्यक्ति को यह अधिकार नहीं है कि वह सार्वजनिक मंच से किसी के सम्मान और व्यक्तित्व पर इस तरह की टिप्पणी करे, डॉ. इंद्रेश कुमार के योगदान का किया उल्लेख उन्होंने आगे कहा कि डॉ. इंद्रेश कुमार का जीवन समाज सेवा,राष्ट्र निर्माण और विभिन्न समुदायों के बीच संवाद स्थापित करने के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने वर्षों तक सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने और देशहित में कार्य किया है। ऐसे में उनके खिलाफ इस प्रकार की टिप्पणी करना न केवल अनुचित है,बल्कि उन लाखों लोगों की भावनाओं को भी आहत करता है जो उन्हें अपना मार्गदर्शक मानते हैं।मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के सभी पदाधिकारियों,कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस प्रकार की गैर-जिम्मेदाराना बयानबाज़ी का कड़ा विरोध करें। उन्होंने कहा कि सभी लोग सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर अपनी आवाज़ उठाएं और स्पष्ट संदेश दें कि समाज में नकारात्मकता और अपमानजनक भाषा के लिए कोई स्थान नहीं है ।सकारात्मकता और भाईचारे का संदेश दें उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि देश की एकता और अखंडता बनाए रखने के लिए जरूरी है कि हम सभी आपसी सम्मान और भाईचारे की भावना को मजबूत करें।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार के विवादित और भड़काऊ बयानों से दूर रहें और समाज में सकारात्मकता फैलाने का कार्य करें।गरिमा और मर्यादा बनाए रखने की अपील इस पूरे मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति किसी के सम्मान को ठेस पहुंचाए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है,लेकिन उस अधिकार के साथ भी जिम्मेदारी और मर्यादा का पालन करना भी उतना ही आवश्यक है।







