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सेवा नहीं, खुला सौदा: मानक विहीन अस्पतालों में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़

JHANSI NEWS: जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं की आड़ में कुछ निजी अस्पतालों द्वारा खुलेआम नियमों की अनदेखी कर मरीजों से मनमाना पैसा वसूले जाने का मामला लगातार चर्चा में है। आरोप है कि कई अस्पताल बिना निर्धारित मानकों, पर्याप्त संसाधनों और प्रशिक्षित स्टाफ के संचालित हो रहे हैं, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है।
कागजों में व्यवस्था, जमीन पर अव्यवस्था
स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पताल संचालन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। इनमें योग्य डॉक्टरों की उपलब्धता, 24 घंटे आपातकालीन सेवा, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ, लाइसेंस, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छता और आवश्यक चिकित्सीय उपकरण अनिवार्य हैं। लेकिन हकीकत यह बताई जा रही है कि कुछ अस्पताल इन मानकों को पूरा किए बिना ही संचालित हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गंभीर मरीजों को भर्ती कर पहले एडवांस जमा कराया जाता है, फिर जांच, दवाओं और अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर भारी-भरकम बिल थमा दिया जाता है। कई मामलों में परिजनों को वास्तविक स्थिति की स्पष्ट जानकारी तक नहीं दी जाती।
डॉक्टरों की औपचारिक मौजूदगी
सूत्रों के अनुसार कुछ अस्पतालों में डॉक्टर नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते। वे केवल औपचारिक राउंड लगाकर चले जाते हैं, जबकि पूरे दिन मरीजों की देखभाल का जिम्मा कम प्रशिक्षित स्टाफ के हवाले रहता है। इससे इलाज की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
अनट्रेंड स्टाफ पर इलाज की जिम्मेदारी
बताया जा रहा है कि कई अस्पतालों में ऐसे कर्मचारियों द्वारा इंजेक्शन, ड्रिप और प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है जिनके पास पर्याप्त चिकित्सीय योग्यता नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति किसी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
जिम्मेदारों से जवाब की मांग जनता अब स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से स्पष्ट कार्रवाई की मांग कर रही है। लोगों का कहना है कि यदि निरीक्षण होते हैं तो उनकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए। मानक विहीन अस्पतालों की सूची जारी कर आमजन को जानकारी दी जाए कि कौन-कौन से संस्थान नियमों का पालन नहीं कर रहे।
सामाजिक संगठनों का कहना है कि केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है। नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों पर आर्थिक दंड के साथ-साथ लाइसेंस निरस्त करने जैसी कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। स्वास्थ्य सेवा को सेवा ही बने रहने देना प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आमजन का विश्वास स्वास्थ्य व्यवस्था से पूरी तरह उठ सकता है।