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सीमित संसाधनों में महान कार्य”: पं. दीनदयाल उपाध्याय SVM में सर जगदीश चंद्र बोस जयंती पर वैज्ञानिक चिंतन की अलख जगी

LAKHIMPUR KHERI NEWS: विद्या भारती विद्यालय पंडित दीनदयाल उपाध्याय सरस्वती विद्या मन्दिर इण्टर कॉलेज (यू०पी० बोर्ड) में 29 नवंबर को महान भारतीय वैज्ञानिक सर जगदीश चंद्र बोस की जयंती को ‘विज्ञान दिवस’ के रूप में अत्यंत उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया।इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को भारतीय विज्ञान के गौरवशाली इतिहास और नवाचार के प्रति प्रेरित करना था। समारोह का औपचारिक शुभारंभ विद्यालय के प्रथम सहायक कुन्तीश अग्रवाल द्वारा दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ हुआ। अपने प्रेरक उद्बोधन में अग्रवाल ने कहा कि, “जगदीश चंद्र बोस केवल वैज्ञानिक नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक हैं जिन्होंने सिद्ध किया कि भारतीय मेधा किसी भी पश्चिमी चुनौती से कम नहीं है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद हम वैज्ञानिक अनुशासन और दृढ़ता से विश्व स्तरीय खोजें कर सकते हैं।” उन्होंने छात्रों से बोस की तरह ही आत्मविश्वास और खोजपरक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन विद्यालय के एक प्रतिभाशाली भैया आर्यन वर्मा कक्षा 11 द्वारा किया गया, जिसने अपने ओजस्वी वक्तव्य से समारोह को ऊर्जावान बनाए रखा। इस दौरान, कई भैया-बहनो ने बोस के जीवन पर अपने उद्बोधन दिए,जिसमें उनके क्रांतिकारी आविष्कार क्रेस्कोग्राफ के सिद्धांत को प्रायोगिक रूप से समझाया गया। छात्रों ने यह प्रदर्शित किया कि कैसे बोस ने वैज्ञानिक तरीके से यह साबित किया कि पेड़-पौधों में भी जीवन होता है और वे भी संवेदनशील होते हैं। यह प्रस्तुति दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। कार्यक्रम प्रमुख आचार्य महेन्द्र कुमार वर्मा ने अपने समापन उद्बोधन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के राष्ट्रीय महत्व पर जोर दिया।आचार्य वर्मा जी ने कहा, “राष्ट्र की प्रगति का आधार वैज्ञानिक चेतना है। हमें केवल विज्ञान को पाठ्यक्रम के रूप में नहीं पढ़ना है, बल्कि इसे अपने दैनिक जीवन, विचारों और निर्णयों में अपनाना है। बोस जैसे वैज्ञानिकों का सम्मान ही हमारे राष्ट्र को 21वीं सदी में अग्रणी बना सकता है।” कार्यक्रम में समस्त विद्यालय परिवार उपस्थित रहा।