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सीएम योगी से हिंदू होने का प्रमाण और गौहत्या पर पूर्ण रोक का 40 दिन का अल्टीमेटम

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अल्टीमेटम के बाद यूपी की राजनीति में उबाल, भाजपा ने बताया राजनीतिक स्टंट, विपक्ष ने संविधान का मुद्दा उठाया
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से ‘हिंदू होने का प्रमाण’ मांगने और गौहत्या पर पूर्ण व सख्त रोक लगाने को लेकर 40 दिन का अल्टीमेटम दिए जाने से प्रदेश का सियासी माहौल गरमा गया है। बयान सामने आते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाज़ी शुरू हो गई है।
अल्टीमेटम देने वाले पक्ष का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में सनातन परंपरा और गौ-संरक्षण की पक्षधर है, तो 40 दिनों के भीतर प्रदेश में गौहत्या और तस्करी पर पूरी तरह अंकुश लगाया जाए। उनका आरोप है कि कानून मौजूद होने के बावजूद ज़मीनी स्तर पर घटनाएं सामने आ रही हैं, जो प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर सवाल खड़े करती हैं।
भाजपा नेताओं ने इस मांग को उकसावे वाली राजनीति करार देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संपूर्ण जीवन सन्यास, हिंदू परंपरा और गौ-संरक्षण से जुड़ा रहा है, ऐसे में उनसे प्रमाण मांगना निराधार और अपमानजनक है। पार्टी का दावा है कि प्रदेश में गौहत्या निषेध कानून पहले से सख्त है और लगातार कार्रवाई की जा रही है।
वहीं विपक्ष ने इस पूरे मामले को संवैधानिक मूल्यों से भटकाने की कोशिश बताया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से धार्मिक पहचान के आधार पर सवाल करना समाज में अनावश्यक तनाव पैदा करता है और असल मुद्दों से ध्यान भटकाता है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, 40 दिन का अल्टीमेटम आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति को और धार दे सकता है। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से ट्रेंड कर रहा है, जहां समर्थक और विरोधी अपने-अपने तर्क रख रहे हैं।
फिलहाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस अल्टीमेटम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन बढ़ती बयानबाज़ी से साफ है कि यह मामला जल्द शांत होने वाला नहीं है।